हिन्दू होने का ये मतलब होता है कि कोई कुछ भी करे आप के खिलाफ , उसे सह लो और हंसते रहो – राहुल गाँधी

हिन्दु्व केवल मात्र शब्द ही नहीं, अपितु अपने आप में एक सम्पूर्ण इतिहास ही है। हिन्दुत्व से अभिप्राय हमारी जाति का कोरा धार्मिक तथा आद्यात्मिक इतिहास ही नहीं जैसा कि कई बार भ्रमवश इसी से मिलते-जुलते शब्द हिन्दूवाद से लिया जाता है। हिन्दूवाद तो वस्तुतः हिन्दुत्व का एक अंश मात्र ही है। अतः यह स्पष्ट है कि जब तक उनमें से दूसरे शब्द का अर्थ सुस्पष्ट न हो जाए तब तक पहले के अर्थ के सम्बन्ध में भी भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति ही बनी रहेगी। कभी युद्ध तो कभी मिलन, और कभी पारस्परिक सहकार के रूप में हिन्दू जाति ने जो कुछ भी किया है वह सभी कुछ इसी नाम ‘हिन्दुत्व’ में ही समाहित है। लेकिन क्या हिंदुत्व वही है जिसे राहुल गाँधी ने बताया आज संसद में ? क्या राहुल गाँधी के बयान श्रीकृष्ण के गीता के संदेशो को चुनौती नहीं दे रहे हैं ?

राहुल गाँधी ने भारी संसद में हिंदुत्व की एक नई परिभाषा बताई है . राहुल गाँधी के अनुसार हिंदुत्व और हिन्दू वो है जो किसी और के द्वारा जो भी किया जा रहा है उसको चुपचाप सह ले और उस पर कोई सवाल न उठाये . राहुल गाँधी ने नरेंद्र मोदी को गले लगाते हुए कहा कि कोई कुछ भी कर दे आप के खिलाफ लेकिन उसको कभी भी कोई प्रतिउत्तर नहीं देना ही हिंदुत्व है जबकि उनके इस बयान से कई धर्मशास्त्री , धर्मगुरु आदि सहमत नहीं हैं . तमाम हिन्दू संगठनों ने भी राहुल गाँधी के बयान को सरासर गलत बताते हुए कहा है कि अधर्म और अन्याय का प्रतिकार करना ही हिंदुत्व है . 

इस मामले में हिन्दू धर्मगुरुओं का साफ़ साफ़ कहना है कि राहुल गाँधी के इस बयान को भगवान् श्रीकृष्ण के गीता के आदेश साफ साफ काट रहे हैं . गीता में साफ़ साफ़ कहा है कि जहाँ भी अन्याय हो रहा हो उसके विरुद्ध अपनी क्षमताओं के अनुसार प्रतिकार करना ही धर्म है और अन्याय को चुपचाप सह लेना अधर्म को बढ़ावा देना है . श्रीकृष्ण के इन्ही शब्दों को सुन कर अर्जुन ने उठ कर पापियों और अधर्मियों को समाप्त किया था . असल में राहुल गाँधी का बयान आम जनता को वही पुरानी लाइन दोहराते रहने का इशारा है जिसमे अहिंसा परमो धर्मः कहा गया है जबकि उसके आगे ही कहा गया है कि धर्म की रक्षा करना और भी परम धर्म है . 

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