संस्कृत शिक्षा को भगवाकरण बता हंगामा मचाने वालों ने उर्दू को बताया देश की शान

ये दुनिया के लिए एक बड़ा आश्चर्य था जब मनमोहन सिंह जी ने एक भाषा के मुद्दे पर अपनी इतनी बेबाक राय रखी है . मनमोहन सिंह पूर्व प्रधानमन्त्री के रूप में अक्सर अपने तमाम भाषण अंग्रेजी में दिए थे लेकिन अचानक ही उनके मुह से उर्दू भाषा की तारीफ़ सुन कर हर कोई हैरान हो गया है . यद्दपि मनमोहन सिंह जी उस पार्टी से है जो स्कूलों में संस्कृत आदि की शिक्षा देने को शिक्षा का भगवाकरण बताती है लेकिन अचानक ही उर्दू के लिए ऐसी तारीफ़ सुन कर हर कोई हैरान हो गया है .

मनमोहन सिंह जी ने साफ़ साफ़ अपने वक्तव्य में कहा है कि उर्दू गंगा-जमुनी तहजीब की जीती जागती तस्वीर है। बतौर मनमोहन सिंह जी सबको उर्दू की इस खासियत पर गौर करना चाहिए और बीते दिनों को याद करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में ये तमाम बातें कहीं लेकिन उन्होंने उर्दू की इतनी तारीफ़ करते हुए भी उर्दू का इस्तेमाल नहीं किया .अश्वनी कुमार की जिस किताब का विमोचन करने श्री मनमोहन सिंह जी गए थे उस किताब का नाम था एहसास-ओ-इजहार जो पांच सितारा होटल ओबरॉय में सोमवार को आयोजित हुआ था ..

यद्दपि इस किताब का वास्तविक विमोचन मुसलमानों को बार बार खतरे में और डरा सहमा बताने वाले और कई हिन्दुओ के कत्ल में शामिल PFI के मंच पर जाने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया जो बाद में मनमोहन सिंह जी को भेंट की गयी . इस दौरान मनमोहन सिंह ने कहा, अश्वनी कुमार ने इस किताब में अपनी दिल की बातें लिखी हैं। अच्छा होता कि यह किताब उर्दू में ही लिखी होती। वहीं पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा, मुझे यकीन है कि जो भी इस किताब को पढ़ेगा वह उर्दू की तरफ आकर्षित होगा। उर्दू के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति टीएस सिंह समेत कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व कलाकार मौजूद रहे।

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