न्यायाधीशों के मतभेद में जिन्दा हुआ जस्टिस कर्णंन का विवाद जिसमे उन्हें जाना पड़ा था जेल

अचानक ही देशा और दुनिया में चर्चा का विषय बन गये सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कांफ्रेंस का मुद्दा अभी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ है .फिलहाल इस मामले में कांफ्रेंस करने वाले जजों ने अपने तेवर थोडा सा ढीले जरूर किये हैं . यहाँ अभी तक एक सवाल जरूर खड़ा होता है कि अपने सीनियर जज के खिलाफ मोर्चा खोलने को यदि संवैधानिक माना जाता है तो जस्टिस कर्णंन का दोष क्या इनसे ज्यादा था ?

विदित हो कि मुकदमे के ‘चुनिंदा’ तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक फैसले के विरूद्ध देश के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने आज भरोसा जताया कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं उनका समाधान होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने जो किया न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए यह किया। जस्टिस कुरियन जोसेफ वहीँ हैं जो नरेंद्र मोदी सरकार के क्रिसमस आदि की छुट्टी पर दिए गये बयान के बाद चर्चा में आये थे . 

स्थानीय न्यूज चैनलों ने कल के घटनाक्रम पर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए यहां के निकट कलाडी में उनके पैतृक घर का रूख किया तो न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ”न्याय और न्यायपालिका के पक्ष में खड़े हुए। यही चीज कल हमने नई दिल्ली में कही। एक मुद्दे की ओर ध्यान गया है। ध्यान में आने पर निश्चित तौर पर यह मुद्दा सुलझ जाएगा।” इस से पहले जजों का आपसी विवाद तब देखने को मिला था जब कलकत्ता हाई कोर्ट के जज को अपने सीनियर से टकराने के अपराध में जेल तक जाना पड़ा था .. 

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