वहां तेजी से गूंजी एक साथ कई आवाज – ” अटल जी से दूर रहो देशद्रोही अग्निवेश”. फिर से विवादों में स्वघोषित तथाकथित स्वामी

अभी हाल में ही जिस अग्निवेश की पिटाई को सीधे सीधे भाजपा के कार्यकर्ताओं और हिन्दू संगठनों से जोड़ कर हल्ला मचाया गया था वही अग्निवेश अचानक ही पहुच गया था था अटल बिहारी वाजपेयी जी के अंतिम दर्शन के लिए रखे गये पार्थिव शरीर के पास . लेकिन शुरू हो गया ऐसा विरोध की इस तथाकथित संत , स्वघोषित स्वामी और भगवा वस्त्रधारी वामपंथी को वहां से निकलना पड़ा . अचानक ही इनको देख कर जनता उन्मादी हो गयी थी और इसको फ़ौरन ही वहां से निकल जाने के लिए बोलने लगी . यद्दपि खुद इनके भावभंगिमा से ऐसा लगा की ये खुद विवाद को बढ़ाना चाह रहे थे और अंतिम यात्रा जैसे बेहद शोकाकुल माहौल को भी विवादित बनाना चाहते थे पर आख़िरकार ये नाकाम रहे …  

खुद अग्निवेश के अनुसार अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय जाते हुए उनके ऊपर लगभग २० से 30 की संख्या में भाजपा के  कार्यकर्ता आए और उन्हें  घेरकर धक्का-मुक्की करने लगे. मेरी पगड़ी गिर गयी और उन्होंने मुझे देशद्रोही कहना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं , विरोध का सुर इतना बढ़ गया की अग्निनेश को वहां से निकल लेने में ही अपनी भलाई दिखी .. लेकिन बाद में वहां से जाने के बाद उन्होंने राजनीति शुरू ही कर दी और दे डाला वही बयान जो नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद तमाम तथाकथित बुद्धिजीवियों , मानवाधिकार वालों ने एक साथ उठाया था . 

उन्होंने कहा, ”उन लोगों ने मुझे विष्णु दिगंबर चौराहे की ओर धक्का देना शुरू कर दिया और मेरे साथ गालीगलौच की. वहां कुछ पुलिस वाले खड़े थे लेकिन कुछ महिलाओं समेत ये लोग हाथों में जूते चप्पल लेकर मुझे अपशब्द बोलते रहे.” स्वामी अग्निवेश ने दावा किया कि उन्होंने बीजेपी ऑफिस जाने से पहले पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को इसकी जानकारी दी थी. वह मारपीट के मामले में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे. उन्होंने कहा, ”पुलिस ने अभी तक मुझसे संपर्क नहीं किया है. मैं पुलिस में शिकायत दर्ज कराउंगा. मुझ पर पहले भी हमला किया गया था और इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की गयी है. हिंसा और असहिष्णुता का माहौल है.”

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