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“भारत बंद” पहला ऐसा राष्ट्रव्यापी आंदोलन जिसमे एक भी राजनैतिक पार्टी शामिल नहीं .. जनता का आक्रोश सड़को पर

हिन्दू समाज को बांटने की वो तमाम राजनैतिक साजिशें उस समय कामयाब होती दिखी जब पहले समाज ने SC ST एक्ट के समर्थन में हिंसक आन्दोलन देखा जिसको पीछे से कुछ राजनैतिक दलों द्वारा हवा दी गयी और भीम आर्मी जैसे संगठनों ने उसमे उन्माद फैलाया .. अब उसी SC ST एक्ट के विरोध में देश भर में हो रहे हैं व्यापक प्रदर्शन और धरना जिसमे कहीं कहीं हिंसक झड़पें और पुलिस से आमना सामना तक होना शामिल पाया गया है . प्रदर्शन कर रही जनता का आक्रोश न सिर्फ केंद्र सरकार से है बल्कि विपक्ष से भी है . इसके चलते ही शोसल मीडिया पर नोटा ट्रेंड कर रहा है . जनता सत्ताधारी पार्टी से सवाल कर रही है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था तो उस आदेश के खिलाफ इस प्रकार से जाने की जरूरत क्या थी और जिस प्रकार से इस मामले में पक्ष विपक्ष एक हुआ है , उस प्रकार से क्या पहले किसी देश हित के मुद्दे पर एक हुआ था .

SC ST एक्ट के लिए आन्दोलन कर रही जनता ने साफ़ कहा है की उनकी लड़ाई अब आरक्षण खत्म होने तक जारी रहेगी भले ही उसके लिए उन्हें कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़ जाए .. ध्यान देने योग्य है कि सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर भारत है जिसमे सवर्ण हिन्दुओ द्वारा आह्वान किये गये इस भारत बंद का ज्यादातर असर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और राजस्थान, छत्तीसगढ़ , झारखंड आदि प्रदेशों में दिख रहा है. अगर सबसे ज्यादा असर की बात की जाय तो मध्यप्रदेश और बिहार में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखा जा सकता है. मध्यप्रदेश के कई जिलों में बंद का असर दिख रहा है, जहां धारा 144 लागू कर दी गई है. वहीं बिहार के दरभंगा में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी है. इससे पहले 2 अप्रैल को SC-ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध दलित संगठनों बंद बुलाया था.

उत्तर प्रदेश में भी भारत बंद का असर दिखने लगा है। प्रदेश में भी भारत बंद का असर दिखने लगा है। आगरा जिले के शमशाबाद में अराजकतत्वों ने डॉ भीमराव अंबेडकर की मूर्ति क्षतिग्रस्त कर दिया। मूर्ति के क्षतिग्रस्त होने से कस्बे में तनाव बढ़ गया है। जानकारी मिलने पर पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में गांव में फोर्स तैनात कर दी गई है, ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न घटे। भारत बंद की वजह से प्रशासन और भी ज्यादा सावधानी बरत रहा है। यहाँ सबसे ज्यादा ध्यान रखने योग्य ये है की पिछले समय SC ST एक्ट के समर्थन में हुए प्रदर्शन के समय लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने उस बंद को समर्थन दिया था लेकिन आज एक भी राजनैतिक दल इन आंदोलनकारियो के साथ खड़ा होता नहीं दिख रहा है . कुल मिला कर इसको जनाक्रोश कहा जा सकता है . ये कहना गलत नहीं होगा कि ये मुद्दा अब केंद्र सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है क्यों इन आंदोलनकारियो में अधिकतर वही लोग हैं जिन्हें भारतीय जनता पार्टी का वोटबैंक माना जाता रहा है . 

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