नरेंद्र मोदी जी की ह्त्या की साजिश पर चुप क्यों है “पुरस्कार वापसी गैंग”?? कहाँ है #NotINMyName वाले?


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ह्त्या की साजिश के खुलासे के बाद राजनैतिक भूचाल आ गया है तथा देश की जनता इस बात को लेकर आक्रोशित है कि देश के प्रधानमन्त्री जी से इतनी ज्यादा नफरत हो गयी कि उनकी ह्त्या करने पर उतारू हो गये. लेकिन इसमें भी आश्चर्य की बात ये है कि प्रधनमंत्री मोदी जी की ह्त्या की साजिश के बाद भी देश में असहिष्णुता नहीं बढ़ी है. पूरा देश देख रहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुने गए गए प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश रची जा रही है और असहनशीलता ब्रिगेड एकदम खामोश है . ये वही क्रांतिकारी हैं जो देश की हर छोटी बड़ी घटना के बाद ये कहते हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है.

देश जानना चाहता है कि छोटी छोटी बातों पर देश को असहिष्णु बताने वाले, लोकतंत्र को खतर में बताने वाले आखिर मोदी जी की ह्त्या की साजिश पर मौन क्यों हैं? प्रधानमन्त्री जी की ह्त्या की साजिश पर आखिर “पुरस्कार वापसी” गैंग सक्रिय क्यों नहीं हो रही हैं? आखिर वो लोग किस बिल में जाकर छिप गये हैं जिन्होंने देश को असहिष्णु बताकर, लोकतंत्र को खतरे में बताकर NotInMyName कैंपेन चलाया था. इससे भी ज्यादा शर्मनाक ये था कि कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने मोदी जी ह्त्या की साजिश को राजनैतिक स्टंट बता दिया. देश के प्रधानमन्त्री की ह्त्या की साजिश का भी कांग्रेस पार्टी मजाक बना रही है जबकि ये वही पार्टी है जो छोटी-छोटी बातों पर देशभर में असहिष्णुता का ढोल बजाती फिरती है.

हम उन लोगों से पूंछना चाहते हैं जिन्हें अक्सर देश में लोकतंत्र ख़तरे में नज़र आता है, जिन्हें देश में असहनशीलता की शिकायत है, जिन्हें लगता है कि देश में अल्पसंख्यक डरे हुए हैं और जिन्हें लगता है कि देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी ख़त्म हो गई है. ऐसे सभी लोगों से हम पूछना चाहते हैं कि वो आज कहां छुपे हुए हैं? भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, अगर अपने चुने हुए प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश को लेकर गंभीर नहीं है, तो ये लोकतंत्र के लिए सबसे अशुभ संकेत है. भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही पुलिस को नक्सलियों की एक चिठ्ठी मिली है, जिसमें किसी रोड शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की बात लिखी है. लेकिन इतनी बड़ी ख़बर पर हमारे देश में बहुत गहरा सन्नाटा फैला हुआ है. इसे लेकर कोई ये नहीं कह रहा कि लोकतंत्र ख़तरे में है. असहनशीलता ब्रिगेड, पुरस्कार वापसी गैंग ने इस पर मौनव्रत धारण कर लिया है. लेकिन इस मौन को तोड़ना होगा. क्योंकि ऐसे षडयंत्र को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

 आपको बता दें कि 1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई थी. और इस हिंसा की जांच करते हुए पुणे पुलिस ने रोना विल्सन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है . इस व्यक्ति के पास मौजूद Electronic Storage Device से एक चिट्ठी मिली है. ये चिट्ठी प्रकाश नाम के एक व्यक्ति को लिखी गई है जिसे Comrade प्रकाश कहा गया है . चिट्ठी लिखने वाले ने अपना कोई नाम नहीं लिखा है सिर्फ… R लिखकर चिट्ठी खत्म कर दी. इस चिठ्ठी की शुरुआत लाल सलाम से की गई है.  इसमें लिखा है कि हिंदू फासीवाद को हराना इन लोगों का मूल मकसद है. और वो इसके लिए अपनी विचारधारा से मेल खाने वाले संगठनों, राजनीतिक पार्टियों और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों से अपने संबंध बेहतर कर रहे हैं. अब आप सोचिए कि वो कौन सी राजनीतिक पार्टियां और संगठन हैं जिनकी विचारधारा इन नक्सलियों से मेल खाती है.

आप ये भी ध्यान दीजिए कि लाल सलाम कहां बोला जाता है. लाल सलाम JNU में बोला जाता है. JNU में कौन से नेता जाते हैं. और इसके बाद चिठ्ठी में लिखा है कि नरेंद्र ‘मोदी को मारने के लिए ये लोग राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर रहे हैं.  इस चिठ्ठी में ये भी लिखा है कि नरेंद्र मोदी को रोड शो में टारगेट करना एक असरदार रणनीति हो सकती है. आपने नोट किया होगा कि इस चिठ्ठी में नरेंद्र मोदी को किसी रोड शो में मारने की बात कही जा रही है. राजीव गांधी की तरह नरेंद्र मोदी भी Protocol तोड़कर जनता के बीच जाते हैं . और शायद नक्सली इसी का फायदा उठाना चाहते हैं . आपने कई बार ऐसी तस्वीरें देखी होंगी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरक्षा घेरा तोड़कर जनता के बीच चले जाते हैं. लेकिन अफ़सोस पुरस्कार वापसी गैंग अभी सोयी सोई हुई है.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...