नेता बोले- “मुझे कोई मतलब नहीं राम से”.. यही नेता अभी कुछ दिन पहले दिखे थे इफ्तार पार्टी में

देश की सेक्यूलर राजनीति जो अक्सर हिन्दुओं का हिन्दू आस्थाओं का दमन करती रही है, ने एक बार फिर से सवाल खड़े किये हैं सनातन के आराध्य प्रभु श्रीराम पर तथा चुनौती दी है हिन्दुओं की आस्था को.. इसी राजनीति ने कभी श्रीराम सेतु को काल्पनिक बताया था तो अब एक बार फिर से नकारा गया है श्रीराम का अस्तित्व तथा कहा गया है कि वह न तो श्रीराम को मानते हैं और न ही श्रीराम मंदिर को.

गौरतलब है कि एकतरफ जहाँ देश ली अधिकतर जनता अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य श्रीरामंदिर निर्माण के लिए लामबंद हो रही हैं वही देश के सेक्यूलर राजनेता खुलकर श्रीराममंदिर के विरोध में खड़े हो गए हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि ये राजनेता हाल ही इफ्तार पार्टी मेंदिखाई दिए थे. इनको इफ्तार में विश्वास है लेकिन राम में नहीं और ये राजनेता हैं जेडीयू से निष्काषित होने के बाद अपनी नई पार्टी लोकरतांत्रिक जनता दल बनाने वाले शरद यादव. शरद यादव ने कहा है कि राम जन्मभूमि में उनकी कोई श्रद्धा नहीं है. वह जिंदा आदमी को पूजते हैं. एलजेडी नेता ने इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ पर भी हमला बोला. शरद यादव ने कहा कि योगी का काम घंटा बजाना है तो वह बजाएं, संविधान से इसका कोई वास्ता नहीं है.\

एलजेडी नेता शरद यादव ने कहा कि अंदिर-मंदिर से हमारा कोई वास्ता नहीं है. उन्होंने कहा कि जिंदा आदमी को पूजते हैं हम. हमारा कोई अंदिर-मंदिर से वास्ता नहीं रहता. शरद यादव ने कहा कि राम से संविधान का वास्ता नहीं है. अयोध्या प्रभु राम की जन्मभूमि है तो उस पर आपकी आस्था है? यह सवाल किए जाने पर शरद यादव ने कहा कि, “आपकी होगी, हमारी नहीं है। क्या हर्ज है. आप भी जिंदा, हम भी जिंदा. इसके आगे शरद यादव ने कहा कि , “योगी जी है, वह घंटा बजाएं. पूजा पाठ का काम बाबाओं का है, इनका संविधान से क्या काम. संविधान में इन बातों का कोई मतलब नहीं है. वह बोले, “संविधान में जब नहीं लिखा, तो मैं क्यों पूजा करूं. संविधान में पूजा करने के लिए कहीं भी नहीं लिखा है. संविधान में इन बातों का कोई मतलब नहीं है.

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