शरिया अदालत पर शुरू हुआ घमासान.. जानिये क्या कहना है इस पर सेक्युलर राजनैतिक दलों का ??

इधर ऑल इंडिआ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एलान किया कि वह देश के हर जिले में शरिया अदालत खोलेगा जो इस्लामिक कानून के मुताबिक़ फैसला सुनाएंगी तो उधर इस पर राजनैतिक घमासान मच गया है. एक तरफ जहाँ भारतीय जनता पार्टी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ सीना ठोंककर खड़ी हो गई है तथा कहा है कि हिंदुस्तान में शरिया अदालत लागू करना मुश्किल ही नामुमकिन है वही इस पर तथाकथित सेक्यूलर राजनीर्तिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी आयी हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा हर जिले में शरिया कोर्ट खोलने की बात का बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कड़ा विरोध किया है. उन्होंने कहा कि भारत कोई इस्लामी गणराज्य नहीं है और अदालतें कानून के अनुसार काम करेंगी. भाजपा सांसद ने कहा, ‘आप धार्मिक मामलों की चर्चा कर सकते हैं, लेकिन अदालतें कानून के अनुसार चलेंगी. ये इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ इंडिया नहीं है.’ उन्होंने कहा कि शरीयत कोर्ट के लिए किसी भी जिले, गांव या शहर स्तर पर कोई जगह नहीं है.  मीनाक्षी लेखी ने कहा कि हिंदुस्तान कोई इस्लामिक मुल्क नहीं है जहाँ शरिया अदालत लगेंगी. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में शरिया लागू करने की सोचने वाले अपनी इस साजिश को त्याग दें क्योंकि भाजपा के रहते ये संभव नहीं होगा.

वहीं शरिया अदालतों के बारे में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि ये अलगाववाद को बढ़ाने और देश को बांटने की कोशिश है. देश में केवल एक कोर्ट है और एक कानून है. देश संविधान से चलता है और इसके बाहर कुछ भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘ऐसे किसी कदम के खिलाफ सरकार को सख्ती से निपटना चाहिए और इन लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार करना चाहिए.’ वहीं इस पर सपा ने भी एतराज जताया है. सपा प्रवक्ता जुही सिंह ने कहा कि देश में एक संविधान है जिसका हर किसी को पालन करना चाहिए. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने भी शरिया अदालत का विरोध किया है. कांग्रेस ने कहा है कि देश में संविधान है तो शरिया की कोई जरुरत नहीं है. हालाँकि अगर देखा जाये तो अगर आज शरिया अदालत की मांग उठी है तो इन्हीं सेक्यूलर दलों के कारण ही उठी है.

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