जावड़ेकर जी ने बताया JIO यूनिवर्सिटी का आशय व स्पष्ट किये कई अनसुलझे सवाल

पिछले दिनों खबर आयी कि मोदी सरकार की तरफ से जिओ इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट यूनिवर्सिटी का प्रमाणपत्र दिया गया है. इसके बाद सभी राजनैतिक दल मोदी सरकार पर हमलावर हो गए कि JIO यूनिवर्सिटी भी बनी भी नहीं तो आखिर मोदी सरकार ने उत्कृष्ट यूनिवर्सिटी का प्रमाणपत्र कैसे दे दिया. इसके बाद ये मामला राजयसभा में भी उठा, जिस पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपना पक्ष रखा है. प्रकाश जावड़ेकर ने उन सभी अनसुलझे सवालों का जवाब दिया है जो जिओ इंस्टिट्यूट को लेकर खड़े हुए थे.

केंद्रीय मंत्री श्री जावड़ेकर ने सदन को बताया कि जियो इंस्टीट्यूट को महज आशय पत्र दिया गया है और विशिष्ट संस्थान का टैग नहीं दिया गया है. हालांकि मंत्री के बयान से विपक्षी दल के सांसद संतुष्ट नहीं हुए और तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा मीडिया की कुछ रिपोर्ट में विशिष्टता के टैग को चुनाव के बांड (जिसके जरिए कॉरपोरेट के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक दल को चंदा दिया जा सकता है।) से जोड़कर देखा गया है तथा उत्कृष्ट संस्थानों की सूची में चेन्नई IIT का नाम क्यों नहीं है. इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्ली और बंबई आईआईटी और बंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के तीन विशिष्ट संस्थानों में प्रत्येक को 1,000 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे, लेकिन किसी निजी संस्थान को इस प्रकार की कोई निधि नहीं दी जाएगी. चेन्नई IIT को शामिल न किये जाने पर जावड़ेकर ने कहा, “सरकार चयन प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थी और अलग रहकर इसका निरीक्षण कर रही थी. विशेषज्ञों के पैनल द्वारा चयन कार्य को अंजाम दिया गया तथा उन्होंने तीन सस्न्थानों को चुना.”

चयन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जियो के प्रायोजक संगठन ने महाराष्ट्र के कर्जत में संस्थान बनाने का प्रस्ताव दिया. संस्थान को अगले तीन साल में मानित विश्वविद्यालय जैसे विशिष्ट संस्थान स्थापित करने का आशय पत्र प्रदान किया गया है. उन्होंने कहा, “प्रायोजक संगठन इस आशय पत्र के प्रदान किए जाने के तीन साल के भीतर अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने के लिए तत्परता दिखाते हुए एक रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा.” उन्होंने सदन को सूचित किया कि नौ जुलाई 2018 को हुई बैठक में विशेषज्ञों की सक्षम समिति की रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बाद उसे मंजूरी प्रदान की गई और आईआईटी-दिल्ली और मुंबई व आईआईएसी-बंगलोर को विशिष्ट संस्थान का दर्जा प्रदान करने की सिफारिश की गई.

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