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आतंकियों के घर वालों के बाद अब बलात्कारियो के घर वालों ने दिखानी शुरू की नकली देशभक्ति. मंदसौर के बलात्कारी के घरवालों ने शुरू की ये बयानबाजी

कभी दुर्दांत आतंकी सैफुल्लाह के परिवार वालों का बयान बना था राष्ट्रीय चर्चा का विषय जब उसके अब्बा ने सीधे सीधे अपने आतंकी बेटे का शव लेने से मना कर दिया था . उस समय दुनिया भर में तथाकथित सेकुलर मीडिया ने उनकी तारीफ के खूब ढोल पीटे थे और उनकी जय जय कार कर डाली थी . यहाँ तक की केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक ने उसके अब्बा की तारीफ़ कर डाली थी .. तभी अचानक ही समय ने करवट ली और दुर्दांत आतंकी सैफुल्लाह का वही अब्बा दिखाने लगा नया रूप .. यहाँ तक की उस बयानबाज अब्बा ने पुलिस की सीधी मुठभेड़ को भी सवाल के घेरे में खड़ा कर दिया था जबकि पूरी दुनिया ने देखा था उसकी जंग पुलिस वालों के खिलाफ .  

फिर बीच में तलाशा गया मासूमो का हत्यारा डाक्टर कफील . उसकी गलती होने के बाद भी अचानक ही रातों रात उसको बना डाला गया मसीहा और सभी कैमरे घूम गए उसकी तरफ जिसमे वो अपने अपने अंदाज़ में पोज़ देने लगा . बाद में उसकी कलई खुली और वो जेल गया जहाँ से लौट कर वो बन गया एक बड़ा नेता जो बयानबाजी में पिछड़ चुका बड़े बड़े कद्दावर नेताओं को भी . अब उसी ख़ास वर्ग ने आतंकियों के बजाय बलात्कारियो के परिवार वालों में भी खोजनी शुरू कर दी है राष्ट्रभक्ति और महानता और इसकी शुरुआत की है मंदसौर में जल्लादों को भी मात दे गए बलात्कारियो के घर वालों से ..

ज़रा विचार करिये .. वो पहले अपने बेटे के मामले में पुलिस से संघर्ष करेंगे , फिर निचली अदालत में अपने बेटे को बचाने का प्रयास करेंगे , फिर उच्च न्यायलय में मामले को ले जायेगे , वहां से अगर राहत नहीं मिली तो वो उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे , अंतिम में राष्ट्रपति से क्षमादान की गुहार भी लगाएंगे .. अगर इन सभी के बाद भी उनका बेटा निर्दोष साबित नहीं हुआ तो वो अपने बेटे को खुद से फांसी देने की मांग अपने हाथ से करेंगे .. … क्या लगा आपको इस बयानबाजी से .. “अगर मेरा बेटा दोषी साबित हुआ” .. में अगर शब्द सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति महोदय के बाद पूरा होगा .. फिर उनके बयान को महानता के साथ दिखाया जाना किस तरफ इशारा करता है . देश ने कई झूठ को पर्दा कर के रखा जिसका अंजाम आज कई स्थानों पर विभाजन के नारों आदि के रूप में देखने को मिल रहा जिसे सेना और पुलिस भी मुश्किल से संभाल पा रही है .. अब इस प्रकार के घटनाओ को ऐसे बयानों के परदे में रखने का क्या अर्थ लगाया जाय .. वो कौन सा चरण हैं जब मंदसौर के राक्षस के परिवार वाले अपने बेटे को दोषी मानेगे ये सवाल वहां किसी ने नहीं किया ..    

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