#भगवा आतंकवाद हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए #Congress द्वारा प्रायोजित एक षड्यंत्र था ?? पूर्व अधिकारी के खुलासे से मचा हडकंप

हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट केस में NIA अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया जिसके बाद “भगवा आतंकवाद” को लेकर देश में सियासी सरगर्मी बढ़ गयी है तथा भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर हमलवार हो गयी है तथा हिन्दुओं को आतंकी बोलने के लिए माफी मांगने की बात कह रही है. गौरतलब है कि 2007 में मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद समेत कई हिन्दुओं को आरोपी बताकर गिरफ्तार किया गया था तथा इसके बाद हिन्दुओं को आतंकवादी बताने की थ्योरी गढ़ी गयी. उस समय केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने हिन्दू आतंकवाद-भगवा आतंकवाद बोलकर हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की.

लेकिन अब NIA अदालत के फैसलेके बाद एक ओर जहाँ भाजपा तो कांग्रेस पर हमलावर है ही वहीं उस समय की कांग्रेस सरकार में गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी ने इसे लेकर बड़ा खुलासा किया है. यूपीए सरकार के दौरान गृह सचिव रहे आरवीएस मणि ने इस मामले की पूरी साजिश सामने ला दी है. उन्होंने कहा, “मक्का मस्जिद ब्लास्ट में हिंदू आतंकवाद जैसा कोई मामला नहीं था, लेकिन मेरे ट्रांसफर के बाद मंत्रालय में ‘हिंदू आतंकवाद’ की कहानी गढ़ी गई. आरवीएस मणि ने कहा कि गृह मंत्रालय ने हवा देकर हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश रची थी” उन्होंने कहा कि इस साजिश में साथ नहीं देने के लिए ही उनका गृह मंत्रालय से ट्रांसफर कर दिया गया था, जिसके बाद सरकार के इस रुख से परेशान होकर उन्होंने रिटायरमेंट के 22 महीने पहले की स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली थी. उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय में काम करने का मतलब था कि राजनेताओं का काम करना, इसलिए एक निष्पक्ष ब्यूरोक्रेट के तौर पर काम करना मेरे लिए संभव नहीं था.

गौरतलब है कि वर्ष 2007 में हैदराबाद के मक्का मस्जिद में बम विस्फोट हुआ था. जानकारी सामने आयी थी कि इस मामले में स्थानीय पुलिस ने आतंकी संगठन हूजी से जुड़े कुछ लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया. इसके बाद देश में हिंदुओं को बदनाम करने की एक साजिश रची गई और नाम दिया गया ‘भगवा आतंकवाद’. दरअसल इस प्रकरण के जरिये यह दिखाने की कोशिश की गई कि मुसलमान ही नहीं हिंदू भी आतंकी होते हैं. अब 11 वर्षों के बाद इस मामले में कोर्ट ने अपना निर्णय सुना दिया है और सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. जाहिर है यह फैसला कांग्रेस की उस साजिश का पर्दाफाश करता है जिसके तहत हिंदुओं को बदनाम करने के लिए ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्द गढ़े गए थे.

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद की गिरफ्तारी के बाद ये बात सामने आयी थी कि मक्का मस्जिद ब्लास्ट के पीछे इस्लामिक संगठन हरकत उल जिहाद का हाथ था और ब्लास्ट करने वाला था वाकर अहमद. ऐसा कहा जाता है तत्कालीन केंद्र सरकार ने कुछ लोगों के निर्देश पर असल आतंकियों को पकड़ने के बाद भगा दिया गया और असीमानंद समेत कई हिंदुओं को फंसा दिया गया लेकिन अब कोर्ट के निर्णय से यह साबित हो गया है कि हिंदुओं को बदनाम करने की हर साजिश के सूत्रधार भी रही हैं. अब जब इस मामले में असीमानंद समेत सभी आरोपी बरी हो गए हैं तो कांग्रेस एनआइए पर सवाल उठा रही है, लेकिन भगवा आतंकवाद साजिश रचने को लेकर कोई जवाब नहीं दे पा रही है.

ये हर कोई जानता है कि कांग्रेस पार्टी की मानसिकता हमेशा से ही हिन्दू विरोध की रही है. मक्का मस्जिद केस के अलावा समझौता ब्लास्ट में भी कांग्रेस की अगुआई में भगवा आतंकवाद की साजिश रची गई थी. 18 फरवरी, 2007 को समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में ब्लास्ट हुआ था. इस केस में भी ये बात सामने आयी थी कि इस केस में दो पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों को पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था, लेकिन महज 14 दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया गया तथा उनके स्थान पर निर्दोष हिन्दुओं को गिरफ्तार किया गया. समझौता विस्फोट तथा मक्का मस्जिद केस में कांग्रेस को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, शिवराज पाटिल और सुशील कुमार शिंदे ने हिंदू आतंकवाद का जाल बुना और इस केस में स्वामी असीमानंद को फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद की साजिश को अमली जामा पहनाया जा सके.


राष्ट्रवादी पत्रकारिता को समर्थन देने हेतु हमे आर्थिक सहयोग करे. DONATE NOW पर क्लिक करे
DONATE NOW

Share