AMU के बारे में वो सच जो आपको नहीं बताया गया… जानकर आप खुद बोलेंगे कि- “धोखा हुआ”

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU ) जिसे अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी के रूप में जाना जाता है..उस AMU के बारे में सनसीखेज खुलासा हुआ है. वो खुलासा जिसे जानकर पूरा राष्ट्र सन्न रह जाएगा. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के बारे में जो सनसनीखेज खुलासा हुआ है उसके मुताबिक़ AMU को अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का दर्जा ही नहीं मिला हुआ है. जी हां, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग (NCMEI) ने SC आयोग को बताया कि AMU को अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं दिया गया है. आपको बता दें कि NCMEI ने SC आयोग को चिट्ठी लिख कर AMU के बारे में यह खास जानकारी दी है.

गौरतलब है कि 6 जुलाई को एससी आयोग ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान से पूछा था कि क्या AMU को Minority Status प्राप्त है? जिसके बाद अपने जवाब में NCMEI ने चिट्ठी में लिखा है कि जामिया मिलिया इस्लामिया को अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को नहीं. गौरतलब है कि 3 जुलाई को SC आयोग के चेयरमैन रामशंकर कठेरिया ने AMU में SC-ST-OBC छात्रों के आरक्षण के लिए अलीगढ़ में बैठक की थी. अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग के इस जवाब पर SC आयोग के चेयरमैन रामशंकर कठेरिया ने कहा कि अब तो सब कुछ साफ हो गया कि AMU अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त विश्वविद्यालय नहीं है. पिछले 10 सालों में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का फंड AMU को केन्द्र सरकार ने दिया है. 2017-18 में ही 1106 करोड़ रुपये की ग्रांट AMU को दी गई थी. जब अल्पसंख्यक आयोग ने यह कहा है कि AMU को Minority Status नहीं है तो तत्काल आरक्षण लागू होना चाहिए.

यह मामला तब फिर से चर्चा में आया जब सांसद सतीश कुमार गौतम ने AMU के वाइस चांसलर को चिट्ठी लिखकर कहा कि यूनिवर्सिटी में एससी और एसटी के लिए आरक्षण को लागू किया जाए. इस बीच केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है जिसमें कहा गया है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है जबकि AMU कप अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी की सुविधाएं मिलती रही हैं.

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