मनमोहन सरकार में जब मालिनी अवस्थी ने श्रीराम पर सुनाया भजन तो उन्हें झेलना पड़ा वो सब जो किसी “इमरजेंसी” से कम नहीं था

इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की ४३वीं बरसी पर कांग्रेस पार्टी का एक बार फिर प्रभु श्रीराम विरोधी चेहरा उजागर हुआ है, और कांग्रेस के इस चेहरे को बेनकाब किया है मशहूर लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने. देष में 43 साल पहले लागू हुए आपातकाल को याद करते हुए मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अपनी जो आप बीती शेयर की है जो कांग्रेस के हिन्दू तथा हिन्दुओं के आराध्य श्रीराम के विरोधी चेहरे को उजागर करती है. उन्होंने सोशल मीडिया परअपना एक वाकया याद करते हुए कहा कि भले ही इमरजेंसी 21 दिनों के लिए लगी हो, लेकिन इसका असर बरसों तक रहा है. उन्होंने साल 2005 के एक किस्से का जिक्र करते हुए कहा कि तब दूरदर्शन पर वह भगवान राम के जन्म का वर्णन करने वाले लोक गायन चैता की प्रस्तुति देने गई थीं लेकिन जैसे ही उन्होंने गाना शुरू किया तो दूरदर्शन के एक अधिकारी ने उन्हें राम से जुड़े गीत गाने से मना कर दिया.

मालिनी अवस्थी ने आपातकाल की 43वीं बरसी पर सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, “इमरजेंसी चाहे सिर्फ 21 महीनों के लिए लागू की गई हो,उसका असर बरसों रहा 2005 में, मैं दूरदर्शन में रिकॉर्डिंग के लिए आमंत्रित थी, चैत का महीना था,मैंने भगवान रामजन्म के वर्णन की चैती गानी प्रारंभ की,तुरंत अधिकारी बोले,राम छोड़ कुछ और गाइये,क्रोध में मैं रिकॉर्डिंग छोड़ बाहर आ गईं।” उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, “यह वाक़या दिल्ली दूरदर्शन का है। मैंने तर्क किया कि आपको भगवान राम से क्या दिक्कत है? राम लोकमानस के नायक हैं और चैती की विशिष्ट लोकविद्या शैली में रामजन्म गाया जाता है, लेकिन रीढ़विहीन अधिकारी डरे हुए अड़े रहे, मैंने कहा, यदि राम को नही गा सकती, तो मैं जा रही घर! जय राम जी की #Emergency” दरअसल, गायिका ने इस वाकये की तुलना इमरजेंसी से की है और कांग्रेस राज पर निशाना साधा है। बता दें कि साल 2005 में केंद्र में यूपीए-1 की सरकार थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे.

मशहूर गायिका मालिनी अवस्थी के इस ट्वीट पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी है. एक यूजर ने लिखा है, “जो कोर्ट में हलफनामा देकर श्रीराम को काल्पनिक बता चुके हों उन गद्दार कोंग्रेसियो or उनसे भयभीत कायर अफसरों से इसी मक्कारी की आशा है..” एक अन्य यूजर ने लिखा है, “सच में 2014 तक मैंने भी आपातकाल को महसूस किया रराजनीति में ।। दूरदर्शन के लोगो से सत्यम शिवम सुंदरम ग़ायब होना इसका सशक्त उधारण है।।” बता दें कि ये वही कांग्रेस है जिसने श्रीरामसेतु को काल्पनिक बताया था तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि कॉंग्रेस सरकार में मालिनी अवस्थी को श्रीराम का भजन न गाने दिया गया. आपको बता दें कि मालिनी अवस्थी मशहूर लोक गायिका हैं तथा अपने हिन्दू राष्ट्रवादी विचारों के लिए जानी जाती हैं.

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