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अलविदा अटल: भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर रो पड़े लालकृष्ण अडवाणी.. बोले- “मेरा सबसे अच्छा दोस्त छोड़कर चला गया”

भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक, पूर्व प्रधानमन्त्री भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर हर कोई दुखी है, रो रहा है तथा नम आँखों से आपने नेता को अंतिम विदाई दे रहा है. लेकिन अगर अटल जी के निधन पर सबसे ज्यादा कोई दुखी होगा तो निश्चित रूप से वह पूर्व उपप्रधानमन्त्री लाल कृष्ण आडवाणी जी होंगे. आडवाणी जी अटल जी के बेहद करीबी दोस्त रहे हैं तथा आज भारतीय जनता पार्टी जिस मुकाम पर है उसमें अटल-आडवाणी जी की अथाह मेहनत, उनका परिशम लगा हुआ है. भाजपा को फर्श से अर्श तक पहुंचाने में अटल जी के साथ अडवाणी जी कंधे से कंधा मिलाकर चलते रहे. जब भी राजनैतिक मित्रता की बात की जाती है उसमें अटल-आडवाणी की दोस्ती के किस्से शीर्ष पर होते हैं. अटल जी के निधन की खबर के बाद जहाँ पूरा हिंदुस्तान दुःख के सागर में डूब गया वहीं उनके सबसे ख़ास दोस्त आडवाणी जी भी अपनी भावनाओं को संभाल नहीं सके तथा अटल जी को याद कर रो पड़े.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए एक चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने अपने और वाजपेयी जी के 65 साल के लंबे साथ के बारे में लिखा है. उन्होंने लिखा है कि कैसे संघ प्रचारक के तौर पर शुरूआत करने से लेकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन तक उनका साथ रहा. आपने मित्र अटल जी को अंतिम विदाई देते हुए आडवाणी जी लिखते हैं- आज अपने गहरे दुख और अवसाद को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं क्योंकि देश आज अपने राजनेता श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से गहरे शोक में है. मेरे लिए, अटलजी एक वरिष्ठ सहयोगी से अधिक थे, वास्तव में वह 65 से अधिक वर्षों से मेरे सबसे करीबी दोस्त थे. उनके साथ बिताया वक्त मुझे याद आ रहा है. आएसएस प्रचारक से लेकर भारतीय जनसंघ की शुरूआत, इमरजेंसी के उस कठिन समय में किए गए हमारे संघर्ष और फिर भारतीय जनता पार्टी की नींव और फिर 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन सब याद आ रहा है.

अटलजी को केंद्र में पहली स्थिर गैर-कांग्रेस गठबंधन सरकार के अग्रणी के रूप में याद किया जाएगा. इस दौरान मुझे छह साल तक उनके डिप्टी के रूप में काम करने का सौभाग्य मिला. मेरे वरिष्ठ के रूप में उन्होंने हमेशा मुझे हर संभव तरीके से प्रोत्साहित किया और मेरा मार्गदर्शन किया. उनकी शानदार नेतृत्व क्षमता, उनकी देशभक्ति और सबसे ऊपर उनके भीतर की मानवीय करुणा और नम्रता ऐसी थी कि विचारधारात्मक मतभेदों के बावजूद वो विपक्ष का भी मन जीत लेते थे. अटल बिहारी वाजपेयी के इसी गुण ने मेरे सार्वजनिक जीवन के सभी आयामों पर अपना प्रभाव डाला………..अटल जी आपकी बहुत याद आएगी…

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