राजनाथ सिंह ने कांग्रेस का वो समय याद दिलाया जब मीट काटने वाले हथियारों से काटे गए थे ज़िंदा इंसान.. जानिये कब हुआ था ये ?

मॉब लिंचिंग को लेकर कांग्रेस पार्टी सहित सारा विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस पार्टी मॉब लिंचिंग को लेकर मोदी सरकार पर लगातार निशाना साध रही है. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता तथा केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने मॉब लिन्चिग पर अपना पक्ष रखते हुए कांग्रेस पर ऐसा जवाबी हमला बोला, जिससे कांग्रेस पार्टी तिलमिला गई. गृहमंत्री हसरी राजनाथ सिंह जी ने कहा कि मॉब लिंचिंग पर वो कांग्रेस हमें ज्ञान दे रही है जिसके शासन में हजारों की संख्या में मीट काटने वाले हथियारों से कसाई की तरह हजारों की संख्या में निर्दोष लोगों का क़त्ल कर दिया गया था तथा ये सब कांग्रेस के इशारे पर हुआ था.

अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने देशभर में मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर दुख जाहिर किया तथा कहा कि मॉब लिंचिंग को स्वीकार नहीं किया जा सकता लेकिन में कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूं कि 1984 का सिख दंगा देश की सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग थी. राजनीतिक विरोधियों पर हमला बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं इस मुद्दे को उठाने वाले लोगों को बताना चाहता हूं इससे भी बड़ा मॉब लिंचिंग का मामला 1984 में सिखों के खिलाफ नरसंहार के समय हुआ था जब मीट काटने वाले हथियारों से सिखों को काटा गया था तथा कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा था कि जब पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है.” बता दें कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही अंगरक्षकों द्वारा हत्या करने के बाद राजधानी नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में सिखों के खिलाफ दंगा भड़क उठा था तथा सिखों का कत्लेआम किया गया था.

आधिकारिक रूप से इन दंगों में 2733 सिखों को निशाना बनाया गया. हालांकि, गैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस नरसंहार में मृतकों की संख्या करीब 4000 से ज्यादा थी. राजधानी नई दिल्ली इन दंगों की वजह से जल उठी थी. कई जगहों पर सिखों के घरों और दुकानों को लूटकर आग के हवाले कर दिया गया था. कई लोगों को जिंदा जलाया गया. दिल्ली के लाजपत नगर, जंगपुरा, डिफेंस कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, महारानी बाग, पटेल नगर, सफदरजंग एनक्लेव, पंजाबी बाग, त्रिलोकपुरी आदि कॉलोनियों में तांडव मचा था. कई गुरुद्वारों में आग लगा दी गई थी, सिखों को काटा गया. सिख विरोधी दंगों के एक पीड़ित मंशा सिंह ने तीन साल पहले दिए इंटरव्यू में कहा था कि उसने अपनी आंखों के सामने अपने तीन बेटों को मरते देखा था, उन्हें टुकड़ों-टुकड़ों में कर दिया गया, लोहे की रॉड से पीटा गया, मैं अपने बच्चे को बचा नहीं पाया, मैं नहीं जानता कि वाहे गुरू ने मुझे क्यों जिंदा रखा.

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