देवकीनंदन ठाकुर के बाद अब शंकराचार्य भी कूदे #SCST आन्दोलन में… बोले- “पूरी तरह से ख़त्म हो आरक्षण”

SCST एक्ट को केंद्र सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. सवर्ण समाज व ओबीसी समाज इस एक्ट के विरोध में पहले से ही लामबंद है लेकिन अब इस एक्ट के खिलाफ धर्मक्षेत्र से भी विरोध के स्वर उठे हैं. मशहूर कथावाचक श्री देवकीनंदन ठाकुर जी इस एक्ट को लेकर पहले से ही काफी मुखर हैं तथा वह इसके लिए मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक विशाल रैली भी कर चुके हैं तथा उसके बाद जिस तरह से वह एक्ट के खिलाफ आक्रामक हुए है, वो कहीं न कहीं केंद्र सरकार के लिए खतरे की घंटी जरूर है क्योंकि देवकीनन्दन की बेहद ही लोकप्रिय हैं तथा काफी अधिक संख्या में उनके शिष्य हैं. लेकिन देवकीनंदन ठाकुर जी के बाद अब शंकराचार्य ने भी SCST एक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा संशोधित रूप में लाया गया SC/ST एक्ट भारतीय समाज में विघटन का कारण बनेगा. उन्होने कहा कि ये क़ानून सवर्णों को शोषित करने वाला है इसलिए इसे वापस लिया जाए.

इसके अलावा शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी ने जातिगत आरक्षण पर भी बयान दिया. द्वारका-शारदापीठ और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि आरक्षण को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके बजाए समाज के हर वर्ग को उन्नति का समान अवसर देकर समाज सेवा के योग्य बनाया जाना चाहिए, तभी सभी की भलाई संभव है. उनके प्रतिनिधि द्वारा जारी बयान में यह जानकारी दी गई है. बयान के अनुसार, स्वामी ने कहा कि जिन्हें शिक्षा, नौकरी, तरक्की सभी में आरक्षण की विशेष सुविधा मिल रही हो, उन्हें कोई क्या सता पाएगा? उन्होंने पूछा कि जब वे आरक्षण का लाभ उठाकर उच्च पदों पर बैठे हैं, तो क्या उन्हें सता पाना सम्भव भी है. उन पर कोई कैसे अत्याचार करेगा. नेताओं को हर व्यक्ति, हर वर्ग के कल्याण के लिए सोचना चाहिए, न कि केवल किसी वर्ग विशेष के लिए.

उन्होंने कहा, ”आरक्षण पूरी तरह से समाप्त होना चाहिए और सबको उन्नति का समान अवसर देकर समाज सेवा के योग्य बनाना चाहिए. अगर बिना योग्यता के आरक्षण के आधार पर डॉक्टर बनाएंगे तो पेट में कैंची ही छोड़गा, और अगर प्रोफेसर बनाएंगे तो वो पढ़ाएगा नहीं. इसी प्रकार, इंजीनियर बनाएंगे तो पुल गिराएगा. ऐसा मत करो. उन्हें भी योग्य बनने दो, उन्हें प्रतिस्पर्धा में आने दो. तब उनकी तरक्की होगी. उनको केवल वोट बैंक बनाकर रखना उनके प्रति अत्याचार के समान है.”

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