तीन तलाक और हलाला प्रेमी मौलवी की केंद्रीय मंत्री की बहन तक को धमकी.. कैसे माना जाए कि ये डरे हुए हैं ?

देश में अक्सर भाजपा विरोधी दल तथा तथाकथित राजनेता एक राग अलापते रहते हैं कि देश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भयभीत हैं तथा खुद को डरा हुआ महसूस कर रहे हैं. पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी तक ये राग अलाप रहे हैं कि मुस्लिओं में भी का माहौल है लेकिन एक इस्लामिक मौलाना ने चुनौती दे डाली है भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता मुख्तार अब्बास नकवी को कि उनकी बहन को इस्लाम से बेदखल कर दिया जायेगा. आश्चर्य होता है कि सीधे सीधे केंद्रीय मंत्री को इस्लामिक मौलाना द्वारा चुनौती दी जाती है लेकिन फिर भी ये लोग डरे हुए हैं.

आश्चर्य की बात ये है कि नकवी की बहन को इस्लाम से बेदखल करने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि वह तीन तलाक तथा हलाला के खिलाफ आवाज उठा रही हैं. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तीन तलाक और हलाला जैसे मुद्दे को लेकर चर्चा में आई आलाहजरत सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान, मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री की बहन फरहत नक़वी को इस्लाम से खारिज करने की चेतावनी इमाम मुफ़्ती ने दी है तथा इन दोनों को आजाद ख्याल की औरतें बताया है. शहर इमाम मुफ़्ती खुर्शीद आलम ने शुक्रवार को हुई जुमे की नवाज के दौरान तकरीर में इस बात का ऐलान किया था. इस पर समाज सेवी फ़रहत ने मीडिया को बताया कि वो औरतों के हक और इंसाफ के लिए लड़ती रहेंगी. फ़रहत नक़वी का यह भी कहना है कि वो धर्म के ठेकेदार तब कहां चले गए थे, जब महिलाओं को 3 तलाक दिया जा रहा था. जब महिलाओं का हलाला किया जा रहा था. हलाला, 3 तलाक़ और बहुविवाह के खिलाफ पीड़ित महिलाओं की आवाज उठा रही हैं तो उन्हें इस्लाम से खारिज करने की धमकी दी जा रही है. फ़रहत का यह भी कहना है की वो इन धमकियों से डरने वाली नही हैं.

उन्होंने कहा कि वो औरतों के हुकूक उनके इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस्लाम में जुर्म सहना भी गुनाह बताया है गया है. फ़रहत एक नहीं कई फ़रहत पैदा हो चुकी हैं. फरहत ने कहा कि अपनी बच्चियों की लिए लड़ते रहेंगे. आला हजरत खानदान की बहू निदा खान का कहना है कि इस्लाम किसी का ट्रेडमार्क नहीं, किसी का कॉपीराइट नही है. संविधान ने हमें अपना अधिकार दिया है. उन्होंने सबीना का मामला उठाते हुए कहा कि औरतों को प्रताड़ित करना एक फैशन बना गया है. निदा और फ़रहत दोनों ही तलाक़ पीड़ित हैं और दोनों ही मुस्लिम महिलाओं के हक और शोषण खिलाफ लड़ती हैं. आज दोनों महिलाएं शोषित मुस्लिम महिलाओं की आवाज बन रही हैं. ऐसे में कई लोग उनके विरोधी बन गए है तथा इसीलिये अब उन्हें इस्लाम से बेदखल किया जा सकता है.

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