हिन्दुओं की एकता से जब बंद हुई धर्मांतरण की दुकाने तो सामने आये मज़हबी ठेकेदार . ईसाई संस्था ने मोदी सरकार पर लगाया गम्भीर आरोप

जो मोदी सरकार धर्मनिरपेक्षता को बचाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है आज वही मोदी सरकार उन्ही लोगों द्वारा तमाम आरोपों का सामना कर रही हैं. इतनी सुविधाएं और इतन विदेश ध्यान रखे जाने के बाद भी आखिर समझ से बाहर है की उन्हें किस बात की कमी है .हाँ ये जरूर हो सकता है की विदेशों से आने वाले पैसे पर सरकार की सख्ती ने कहीं न कहीं कईयों को पीड़ा दी है जो पैसे व्यक्तिगत हित को साधने के लिए आते थे न कि राष्ट्र हित को सहेजने के लिए ..

विदित हो कि  नरेंद्र मोदी द्वारा संचालित भारत सरकार पर भारत की शीर्ष कैथोलिक संस्था ने अचानक ही बड़ा हमला बोला है। इस पूरे रचित अभियान की अगुवाई कर रहे कैथोलिक संस्था के बिशप को भारत में धार्मिक उन्माद  नजर आता है . उन्होंने कहा की हिन्दुओं का ध्रुवीकरण किया जा रहा है जबकि हिन्दू भारत के ही कई इलाकों में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है . अगर करीब से इस पूरे मुद्दे को देखा जाय तो केवल हिन्दुओ की एकता इनको रास नहीं आ रही क्योकि हिंदुत्व का हर वर्ग अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट हो रहा है जिसके चलते कईयों की धर्मांतरण की दुकाने बंद सी होने लगी है . 

अभी कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस की पत्नी संता क्लाज के कार्यक्रम में गई थी जिसके बाद अचानक ही इस प्रकार के बयान उनके खिलाफ एक एक प्रतिउत्तर के रूप में ये बयान माना जा रहा है . ये बयान जारी करने वाली  कैथोलिक बिशप कॉफ्रेंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कार्डिनल बेसलियोस क्लीमिस ने कहा कि ईसाई समुदाय की बात करें तो सतना में जिस तरह से पादरियों व सेमिनरीज पर हमला किया गया और राज्य सरकार ने पादरियों के खिलाफ मामला दर्ज किया, गरीबों और निर्दोष लोगों को गिरफ्तार किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, उसकी वजह से सरकार में हमारा भरोसा अब नहीं रहा, हम इस सरकार में अपना भरोसा खो रहे हैं। 

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