पक्ष और विपक्ष दोनों में था अटल जी का अथाह सम्मान.. जानिये राजीव गांधी के समय की वो घटना जिसे जान आप भी हो जायेंगे नतमस्तक

आज पूरा देश भारतरत्न पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर के बाद आसुओं के सागर में डूबा हुआ है तथा आपने नेता को आखिरी श्रद्धांजलि दे रहा है. सभी जानते हैं कि अटल जी अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन देश इस बात का विश्वास ही नहीं कर पा रहा है कि अटल भी अब नहीं है. अब जब अटल जी हमारे बीच नहीं हैं जो अटल जी जी के जीवन की तमाम स्मृतियाँ सामने आ रही हैं. अटल जी के जीवन का एसा ही एक किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं जो अटल जी तथा राजीव गांधी से सम्बन्धित है.

हम सभी जानते हैं कि अटल जी एक ऐसे नेता थे जिनका सम्मान उनके विरोधी भी करते थे. भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था कि वह 1952 से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन कभी किसी पर कीचड़ नहीं उछाला. वह दरअसल राजनीति में मानवीय मूल्‍यों के पक्षधर थे. इसकी बानगी इसी बात से समझी जा सकती है कि उनके इस देश में आजादी के बाद सबसे लंबे समय तक राज करने वाले नेहरू-गांधी परिवार के साथ रिश्‍ते सहज रहे, जबकि विचारधारा के स्‍तर पर धुर विरोधी थे लेकिन चाहे वह नेहरू हों, इंद्रा गांधी हों या राजीव गांधी हों… अटल जी ने जमकर विरोध किया लेकिन उनका सम्मान भी किया, यही कारण था कि ये भी अटल जी का बेहद सम्मान करते थे तथा नेहरू जी ने ही भविष्यवाणी की थी कि ये अटल एक दिन जरूर प्रधानमन्त्री बनेंगे.

आपको बता दें कि 1987 में अटल बिहारी वाजपेयी किडनी की समस्‍या से ग्रसित थे. उस वक्‍त उसका इलाज अमेरिका में ही संभव था. लेकिन आर्थिक साधनों की तंगी के कारण वह अमेरिका नहीं जा पा रहे थे. इस दौरान तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को पता नहीं कैसे वाजपेयी की बीमारी के बारे में पता चल गया. उन्‍होंने अपने दफ्तर में वाजपेयी को बुलाया. उसके बाद कहा कि वे उन्‍हें संयुक्‍त राष्‍ट्र में न्‍यूयॉर्क जाने वाले भारत के प्रतिनिधिमंडल में शामिल कर रहे हैं. इसके बाद अटल जी को राजीव गांधी ने अमेरिका भेजा तथा सारा प्रतिनिधि मंडल लौट आया लेकिन राजीव जी ने अटल जी नहीं आने दिया तथा उनका वहां इलाज हुआ. ये अटल जी का व्यक्तित्व ही था कि उनके धुर विरोधी नेता ने इस तरह से अटल जी का इलाज कराया. इस घटना का जिक्र मशहूर पत्रकार करण थापर ने अपनी हाल में प्रकाशित किताब द डेविल्‍स एडवोकेट में किया है. थापर ने लिखा है कि 1991 में राजीव गांधी की हत्‍या के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको याद करते हुए इस बात को पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा. उन्‍होंने करण थापर को बताया, ”मैं न्‍यूयॉर्क गया और इस वजह से आज जिंदा हूं.” दरअसल न्‍यूयॉर्क से इलाज कराकर जब वह भारत लौटे तो इस घटना का दोनों ही नेताओं ने किसी से भी जिक्र नहीं किया. कहा जाता है कि अटल जी ने पोस्‍टकार्ड भेजकर राजीव गांधी के प्रति आभार प्रकट किया था. राजीव गांधी की मौत के बाद इस घटना के बारे में जब खुद अटल बिहारी वाजपेयी ने करण थापर के प्रोग्राम Eyewitness में ये बात कही, तभी पूरी दुनिया को इस बारे में पता चला. अटल जी अब सिर्फ यादों में..

Share This Post