आपराधिक साजिश के पीछे छिपी राजनैतिक साजिश हुई ध्वस्त .. खट्टर पर आया मोदी का फैसला

जब एक तरफ एक नहीं दो प्रदेश जल रहे थे , जब पुलिस के जवान हर गली हर नुक्कड़ पर मोर्चा सम्भाल कर केवल और केवल इस कोशिश में थे कि उन्हें कैसे भी कुछ साजिशकर्ताओं द्वारा लगाईं गयी इस आग को बुझाना है तब ठीक उसी समय कुछ ऎसी राजनीति के धुरंधर भी थे जो एक बार भी हिंसा आदि रुकने की अपील किये बिना केवल एक रट लगा कर बैठ गए थे ..

वो रट थी कि मुख्यमंत्री खट्टर इस्तीफा दें . उन्हें पता था कि इतने बेगुनाह मारे गए है और जनता का रुख विपरीत है . ऐसे में जनता को समझाने के बजाय वो निकल पड़े उन लाशो पर राजनीति करने जो उनका पुराना पेशा था . ठीक वैसे ही जैसे कभी गुजरात में की गयी थी . हाँ मुज़फ्फरनगर , शामली , असम आदि स्थानों पर नही की क्योंकि वहां तथाकथित धर्म निरपेक्ष सरकार थी . 

कुछ ही दिन पहले योगी आदित्यनाथ जी का भी इस्तीफा माँगा जा रहा था बच्चो की मौत का कारण मान कर जबकि उसके पीछे बाद में डाक्टर कफील जैसे जल्लाद निकले . यकीनन डेरा सच्चा सौदा की ये हिंसा एक अक्षम्य अपराध है पर जब इसकी वृहद् जांच होगी तो इसमें कुछ और भी अप्रत्याशित तथ्य भी निकल कर सामने आ सकते हैं . फिलहाल भारत का हाई कमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को ही हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाए रखने के पक्ष में है और अपनी पार्टी की जांच में उन्होंने श्री खट्टर को क्लीन चिट दे दी .. इस खबर से वो अधिकारी आदि भी राहत की सांस ले रहे है जो श्री खट्टर के साथ इन हालातों से निबटने की रूपरेखा पर कार्य भी कर रहे हैं  और हालत को काफी हद तक काबू कर भी चुके हैं . 

इस क्लीन चिट पर भी अचानक राजनीति शुरू हो गयी और हुड्डा ने साफ़ कहा कि जनता क्लीन चिट नहीं देगी . यद्दपि मनोहर लाल खट्टर जी हरियाणा के लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और जनता ने उन्हें हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में सहर्ष स्वीकार भी किया है पर पहले योगी , फिर खट्टर आदि और उसी बीच सुरेश प्रभु के लिए अचानक बनाए गए इस्तीफे जैसे हालत कहीं ना कहीं किसी बड़े षड्यंत्र की तरफ इशारा कर रहे हैं . 

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