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ISIS ने उनसे कहा कि – जुड़ना है तो क़त्ल कर के दिखाओं, और “जो हुक्म” कह कर उन्होंने निर्दोष रमेश चन्द्र शुक्ल को मार डाला


जिस सैफुल्लाह के लिए विपक्ष ने तमाम दलीलें दे डाली उसके कारनामों की कलई ऐसे खुल रही है कि NIA जैसी उच्चप्रशिक्षित जांच एजेंसी भी अचंभित है. 

सैफुल्लाह के गिरफ्तार मित्रों ने जांच एजेंसी को बताया कि वो और उसके साथ ISIS में भर्ती होने के लिए पूरी तरह से तैयारी कर चुके थे और सीरिया जाने कि तैयारी बना चुके थे. उन्होंने सोशल साइट आदि माध्यमो से ISIS को जब कई बार संपर्क किया तब उधर से जवाब आया कि उनसे जुड़ना है तो कत्ल कर के दिखाओ. 


यहीं से तैयार हुई एक निर्दोष, निरपराध पूर्व प्रधानाध्यापक रमेश चन्द्र शुक्ला की हत्या की साज़िश. रमेशचंद्र को पता भी नहीं था कि उनका पीछा मौत बन कर वो लोग कर रहे जिन्हें वो जानते भी नहीं है . इस पूरी घटना की जांच करने के लिए आतंकी फैज़ल और गौस मोहम्मद को ले कर NIA की टीम कानपुर के जाजमऊ में पहुंची. NIA के अनुसार प्रिंसिपल रमेशचन्द्र हत्याकांड में गौस मोहम्मद भी शामिल था. 

हत्या करने से पहले सैफुल्लाह ने हत्या का एक सीन बना कर प्रैक्टिस किया और फिर निकल पड़े एक निर्दोष , बेगुनाह की जान लेने. वाजिदपुर पुलिया के पास प्रिंसिपल साहब जब साइकिल से आ रहे थे तब सैफुल्लाह और आतिफ ने उनके सामने से गोली चलाई . गोली प्रिंसिपल साहब को नहीं लगी पर वो घबरा कर साईकिल से गिर पड़े . गिरने के बाद सैफुल्लाह और आतिफ ने उनके पास जा कर उन्हें 2 गोलियां और मार कर उनका कत्ल कर दिया. 

क़त्ल करने के बाद अगले दिन अखबारों में छपी एक निर्दोष के क़त्ल की खूनी कहानी का इन तीनों ने कटिंग बना कर ISIS को भेजा और बताया कि आपने कहा और हमने मार डाला.


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