नामी विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी माना भारत के गौरवमय इतिहास को.. प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के समय में आज से कहीं बेहतर था विज्ञान

ये भारत के इतहास का वो गौरशाली अतीत है जो अब प्रोफेसरों और अध्यापको के मुह से भी निकल रहा है . इस इतिहास को बहुत छिपा कर और साजिशों कि परत के नीचे दबा कर रखा गया था . आख़िरकार वो सच देर से ही सही पर भारत के तमाम स्तम्भों के मुह से निकलने लगा है जिसको भारत की शिक्षा की रीढ़ कहा जाता है . कुछ समय पहले जब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव ने ऐसे ही गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया था तो उनके खिलाफ एक वर्ग ने हल्ला बोल दिया था .

लेकिन अब वही गौरवशाली अतीत निकला है आंध्र प्रदेश यूनिवर्सिटी के कुलपति जी नागेश्वर राव जी के मुह से जिन्होंने भारतीय विज्ञान कांग्रेस में दिए अपने एक संबोधन में साफ़ साफ़ कहा है कि महाभारत काल में भारत का ज्ञान विज्ञान आज से समय से कहीं उन्नत और बेहतर था . उस समय चिकित्सा आदि की विधियाँ कहीं उच्च तकनीकी की थी .. उन्होंने कौरव और पांडवों को न सिर्फ प्रबल बलशाली योद्धा बताया बल्कि बड़े अनुसन्धानी भी कहा .

समाचार एजेंसी द हिन्दू के अन्सुअर ये सम्बोधन श्री नागेश्वर राव जी पंजाब के जालंधर में आयोजित एक कार्यक्रम में दे रहे थे .  उन्होंने कहा कि भारत के पास हज़ारों साल पहले से ही लक्ष्य केंद्रित मिसाइल तकनीक का ज्ञान था. अपने आगे के सम्बोधन में श्री नागेश्वर राव ने कहा कि भगवान राम के पास अस्त्र-शस्त्र थे जबकि भगवान विष्णु के पास ऐसा सुदर्शन चक्र था जो अपने लक्ष्य को भेदने के बाद वापस लौट आता था. अपने आगे के सम्बोधन में कुलपति ने रावण के पास 24 तरह के विमान होने की बात भी कही. जालंधर स्थित लवली प्रोफ़ेश्नल यूनिवर्सिटी में इस बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को की थी.

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