धर्मान्तरण की जड़ों पर केन्द्रीय गृहमंत्री का वार… बयान से हिली मिशनरियों की जड़ें

  गृह मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका समेत लगभग सभी देशों में अल्पसंख्यक धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग करते            हैं, जबकि भारत में बहुसंख्यक माँग कर रहे हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून होना चाहिए. यह चिंता की बात है.

धर्मान्तरण की मशीन ईसाई मिशनरियों को लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने बड़ा बयान दिया है. गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एक ईसाई संगठन के ‘शांति उत्सव’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा धर्म को चुनना व्यक्ति की अपनी मर्जी है, उसका अपना विशेषाधिकार है लेकिन जब बड़ी संख्या में सामूहिक धर्मान्तरण होता है, तो न सिर्फ ये चिंता की बात है बल्कि इस पर सवाल भी खड़े होंगे. उन्होंने कहा कि सामूहिक धर्मान्तरण किसी भी राष्ट्र के लिए बेहद चिंताजनक है तथा ये स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी व्‍यक्तिगत तौर पर किसी भी धर्म को स्‍वीकार करने के लिए स्वतन्त्र है. लेकिन सामूहिक धर्मांतरण की अनुमति नहीं दी जा सकती. यदि ऐसा होता है तो इस पर बहस ज़रूरी है. गृहमंत्री ने यह भी कहा, “मैं ईसाई समुदाय को लेकर एक चीज और कहूँगा. हम किसी के ख़िलाफ़ कोई आरोप नहीं लगाना चाहते. अगर कोई व्यक्ति किसी धर्म को अपनाना चाहता है तो उसे ऐसा करना चाहिए. इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. लेकिन सामूहिक धर्मांतरण में बड़ी संख्या में लोग धर्म बदलना शुरू कर देते हैं. यह किसी भी देश के लिए चिंता की बात है.”

गृह मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका समेत लगभग सभी देशों में अल्पसंख्यक धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग करते हैं, जबकि भारत में बहुसंख्यक माँग कर रहे हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून होना चाहिए. यह चिंता की बात है. केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि राजग सरकार को बदनाम करने की कई कोशिशें होती रही हैं. यहाँ तक कि चर्च पर पत्थर फेंके गए. कुछ पादरी आए और मुझसे सुरक्षा देने की माँग की. आपने देख होगा, पत्थरबाज़ी की यह घटनाएँ विधानसभा चुनावों से महज एक महीने पहले ही शुरू हुईं थीं और यह घटनाएँ चुनाव ख़त्म होने के बाद बंद भी हो गईं. आप इस पर क्या कहेंगे? इसमें किसकी साजिश है?

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