हलाला की हैरान करती हकीकत…

इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में हलाल और हलाला यह ऐसे दो शब्द है जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है, दिखने में यह शब्द एक जैसे लगते है पर यह बात तो सभी जानते हैं कि जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं तो इसे हलाल करना कहते है, हलाल का अर्थ अवर्जित होता है।

लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं, क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली और मूर्खतापूर्ण कानून की आड़ में मौलवी और मुफती खुल कर अय्याशी करते हैं। तलाक दी हुई अपनी बीवी को दोबारा अपनाने का एक तरीका है जिस के तहेत मत्लूका तलाक दी गई पत्नी को किसी दूसरे मर्द के साथ निकाह करना होगा और उसके बिस्तरी की शर्त लागू होगी फिर वह तलाक देगा बाद इद्दत खत्म औरत का तिबारा निकाह अपने पहले शौहर के साथ होगा तब जा कर दोनों तमाम जिन्दगी गुजारेंगे।
यदि किसी ने पत्नी को तलाक दे दिया तो उस स्त्री को रखना जायज नहीं होगा जब तक वह स्त्री किसी दूसरे व्यक्ति से सहवास न कर ले फिर वह व्यक्ति भी उसे तलाक दे तो फिर उन दोनों के लिए एक दूसरे की तरफ पलट आने में कोई दोष नही होगा। हलाला का असली उद्देश्य पति पत्नी से सुलह कराना नही बल्कि तलाक दी गई औरत से वेश्यावृत्ति करना है जो इस हादिसों से साबित होता है। जिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं वहां मुल्ले मुफती अपने दफ्तर बना लेते हैं और साथ में दस बीस मुस्टंडे भी रखते हैं इनका काम फतवे देना होता है चूंकि इस विज्ञान के युग में नेट फोन और फैक्स जैसे साधन सामान्य है और उन्ही के द्वारा तलाक देने का रिवाज हो चला है।
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