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आतंकियों के काल बने मेजर गोगोई पर खुद भारत के सैन्य अधिकारियों ने की थी कार्यवाई.. उस दिन जश्न मनाया था आतंकियों ने और अब बहा दिया खून

ये देश तब चैन से सो पाता है जब वो रात को पहरे पर होता है. चाहे पसीने से लथपथ कर देने वाली गर्मी का मौसम हो या फिर हाड़ कंपा देने वाली सर्दी.. जब उसके तन पर वर्दी होती है वो कभी इससे विचलित नहीं होता. जब भी दुश्मन देश की तरफ आँख उठाता है तो वह उसको रोकने के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देता है. उसके सामने भी दो विकल्प होते हैं कि वह देश को चुने या अपने परिवार को लेकिन वह देश को चुनता है तथा देश की रक्षा के लिए अपने परिवार को रोता छोड़ वह भारतमाता की जय तथा वन्देमातरम बोलते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर देता है.

इस सबके बाद भी हमारे देश में सैनिक को निशाना बनाया जाता है. सैनिक जब बलिदान देता है तो हम श्रद्धांजलि देकर अपनी इतिश्री कर लेते हैं लेकिन जब सैनिक देश के दुश्मनों का खात्मा करता है तो हमारे ही बीच के कुछ लोग सैनिक के खिलाफ खड़े हो जाते हैं. मेजर लीतुल गोगोई को पूरा देश जानता है. वही मेजर गोगोई जो देश के दुश्मन इस्लामिक आतंकियों का काल बने हुए थे. मेजर गोगोई का नाम सुनते ही न सिर्फ इस्लामिक आतंकी बल्कि इन इस्लामिक आतंकियों के आका भी कांप उठते थे.

फिर एक समय ऐसा आया जब वीरता, शौर्य तथा पराक्रम का पर्याय तथा आतंकियों के लिए काल का दूसरा नाम बन चुके मेजर गोगोई के खिलाफ खुद भारत के ही सैन्य अधिकारियों ने कार्यवाई की. जब मेजर गोगोई आतंकियों के लिए काल बन रहे थे उस समय देश एक अंदर बैठे तमाम बुद्धिजीवी तथा सेक्यूलर नेता मेजर गोगोई के खिलाफ तनकर खड़े हो गये थे. फिर एक साजिश के तहत मेजर गोगोई को फंसाया गया और भारतीय सैन्य अधिकारियों को मेजर गोगोई के खिलाफ कार्यवाई करनी पड़ी.

जब मेजर गोगोई के खिलाफ भारतीय सैन्य अधिकारियों द्वारा कार्यवाई की गई तो उस समय इस्लामिक आतंकियों ने जश्न मनाया था क्योंकि उन्हें मालूम था कि उनके आका सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं है बल्कि हिंदुस्तान में भी हैं. आतंकियों के प्रति हमदर्दी तथा मेजर गोगोई के खिलाफ हुई कार्यवाई का ही ये नतीजा है कि कश्मीर के पुलवामा में 40 से ज्यादा हमारी सेना के जवानों की जान गई है. इस क्रूरतम हमले के बाद देश एक ही सवाल पूंछ रहा है कि आखिर कब तक हमारे जवान इस कायर राजनीति की भेंट चढ़ते रहेंगे क्योंकि वह पाकिस्तान से तो बदला ले सकते हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या देश के अंदर बैठे गद्दार हैं.

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