अनाथ बच्चों को सहारा देने के बजाय बनाया जा रहा था मुसलमान.. जांच में आया मदरसा और उत्तर प्रदेश

अनाथ बच्चों को सहारा देने की आड़ उनको मुसलमान बनाने की साजिश का भंडाफोड़ हुआ है. मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक़,  पूर्वोत्तर राज्यों के बेसहारा बच्चों को बाहर ले जाकर धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है. अरुणाचल के मूलवासी समुदाय के एक ऐसे ही बच्चे को उत्तर प्रदेश के एक मदरसे से उसके एक रिश्तेदार सिलीगुड़ी लेकर आये हैं. हिम बहादुर सोनार नामक यह रिश्तेदार सिलीगुड़ी के प्रधान नगर थाना अंतर्गत उत्तर पलाश इलाके में रहते हैं. उन्होंने बताया कि उनके 12 साल के अरुणाचल निवासी भतीजे तोलो तायू को मुसलमान बनाकर दिल्ली के पास उत्तर प्रदेश के एक मदरसे में रखा गया था. बच्चे के पिता का नाम बेते तायू है. उसका घर अरुणाचल प्रदेश के अपर दिबांग वैली जिले के अनिनी में है.

हिम बहादुर सोनार ने बताया कि वह बच्चे के फूफा हैं. उनकी पत्नी अरुणाचल प्रदेश की हैं. उन्होंने बताया कि तोलो तायू की मां बचपन में ही उसे छोड़कर कहीं चली गयी. इसके बाद से उसके पिता का दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहा. इसी दौरान तोलो तायू किसी माध्यम से असम के तिनसुकिया जिले के चपाखोवा में किसी मौलवी से संपर्क में आया. बच्चे को बेहतर जिंदगी देने के नाम पर वह उसे स्थानीय मदरसा ले गया. उसके बाद बच्चे को बाहर भेज दिया गया. दो साल बच्चे की अपने परिजनों से मुलाकात नहीं हुई थी. लापता बच्चे की बुआ आशा देवी सोनार की शादी सिलीगुड़ी में हुई है. उन्होंने अपने पति हिम बहादुर सोनार से अपने भतीजे को खोजने में मदद का अनुरोध किया.
हिम बहादुर ने बताया कि उन्होंने उस मौलवी से संपर्क किया जो बच्चे को ले गया था. मौलवी सही ठिकाना नहीं बता रहा था. कभी उत्तर प्रदेश तो कभी दिल्ली के मदरसे में होने की बात करता था. काफी कोशिश करने और पुलिस की धमकी देने के बाद मौलवी ने बच्चे की सही जानकारी दी. मौलवी से पता चला कि बच्चे का नाम बदलकर मोहम्मद अरशद रखा गया है और वह मुजफ्फरनगर के एक मदरसे में रहता है. दबाव बढ़ाने पर वहां के मौलवी ने घर-परिवार से मिलने के लिए बच्चे को 15 दिन के लिए घर ले जाने की अनुमति दी. इसके बाद बच्चे को ले जाने के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जाने के रास्ते में स्थित खतौली बुलाया गया. लेकिन हिम बहादुर सोनार ने बच्चे को किसी भाड़े की कार से नयी दिल्ली भेजने के लिए कहा. तीन हजार किराया देने की बात कहने पर उस बच्चे को नयी दिल्ली रिजर्वेशन काउंटर के पास छोड़ दिया गया.
बच्चे के पास मदरसे का एक पहचान पत्र भी मिला, जिसमें जमीयतुल इमाम वलीउल्लाह अल-इस्लामिया, फुलत, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का पता दर्ज है.  श्री सोनार ने कहा कि दिल्ली के पहाड़गंज थाने की पुलिस ने बच्चे को बरामद करने में काफी सहयोग किया. इसके अलावा कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस काम में मदद की. बच्चे को बरामद करने के आधे घंटे बाद ही वह वापस मदरसा जाने की जिद करने लगा. यहां तक कि मदरसा से वापस ले जाने पर आत्महत्या की धमकी देने लगा. इसके बाद आरएसएस कार्यकर्ताओं ने उसे काफी समझाया-बुझाया. बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत वापस ले जाना संभव नहीं था. इसलिए उसे नयी दिल्ली के एक होटल में पांच दिन तक रखा गया. बच्चा जब सामान्य हुआ तब उसे सिलीगुड़ी लाया गया.
हिम बहादुर सोनार ने बताया कि इस पूरे अभियान के दौरान यह सामने आया कि पूर्वोत्तर राज्यों के दूरदराज के गांवों और आदिवासी क्षेत्रों से गरीब परिवार के बेसहारा बच्चों को उत्तर प्रदेश ले जाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. इस मामले में उन बच्चों को खास तौर पर निशाना बनाया जाता है, जो अनाथ होते हैं. उनके निकट रिश्तेदारों को मदरसे में मुफ्त शिक्षा व अच्छी देखभाल का आश्वासन देकर बच्चों को ले जाया जाता है. रिश्तेदार भी ‘चलो जान छूटी’ मानकर बच्चे को बिचौलिये के हवाले कर देते हैं. बाद में इन बच्चे को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, खतौली, बागपत, बड़ौत व मेरठ के मदरसों में लाकर इन्हें मुसलमान बना दिया जाता है. इसके बाद बच्चों का इस तरह ब्रेन वॉश किया जाता है कि वे मदरसा छोड़कर अपने घर नहीं लौटना चाहते. हिम बहादुर ने धर्म परिवर्तन के इस गिरोह के खिलाफ  कार्यवाई की मांग की है.
Share This Post