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सुब्रमण्यम स्वामी की चुनौती… अयोध्या ही नहीं, मथुरा और काशी भी वापस करो, नहीं तो पूरे 40 हजार का होगा हिसाब

जिस तरह से फिल्मों में रजनीकांत का दबदबा है ठीक उसी दबदबे के साथ उन्हें राजनीति में भी उतारने की तैयारी की जा रही है और इस पर सभी अपने अपने विचार दे रहे हैं। इसी के साथ ही सुब्रमण्यम स्वामी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज राजनीति के साथ ही पत्रकारिता में भी प्रवेश की कोई अर्हता तय नहीं है। उन्होंने कहा कि अनपढ़ रजनीकांत को ही सब राजनीति में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। 
इसके अलावा स्वामी ने जेएनयू का नाम बदलने की भी बात की। 2018 में अयोध्या में राम मंदिर बनने की बात पर चर्चा करते हुए स्वामी ने कहा जल्द ही इस बारें में कोर्ट का फैसला भी आ जाएगा। वैसे भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद से हमारा पक्ष मजबुत है और जुलाई में हम फिर से इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट जा रहे है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में हमारे 40 हजार मंदिर तोडे गए थे और इनमें से तीन मंदिर तो हमे हर हाल में वापस चाहिए जिनमें अयोध्या, मथुरा और काशी के मंदिर शमिल है। 
इस पर उन्होंने ओवैसी को कृष्ण फार्मूला देते हुए कहा कि जिस तरह कृष्ण ने पांडवों के लिए दुर्योधन से पांच गांव मांगे थे ठीक वैसे ही तीन मंदिर मांगे हैं। स्वामी ने कहा कि या तो तीन मंदिर दे दो नहीं तो फिर पूरे 40 हजार मांगेंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिए हैं कि वो पता लगाए कि मस्जिद के नीचे मंदिर था या नहीं। विशेषज्ञों ने भी इसे स्वीकारा है। 
इसी के साथ स्वामी जी ने नरसिंहाराव सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि तब केंद्र सरकार ने कोर्ट में हलफनामें में कहा कि अगर मस्जिद के नीचे मंदिर निकला तो जमीन हिंदुओं को दे दी जाएगी और ये भी कहा कि राम मंदिर के दूसरे पक्षकार कहीं से कहीं तक भी मस्जिद की बात नहीं करते है। वो सिर्फ इतना कहते है कि इस जमीन पर पिछले 500 साल से हमारा कब्जा है और इसपर स्वामी जी ने उन्हें सलाह भी दी थी कि अयोध्या में सरयुपार बहुत जमीन पडी है। यदि वहां पर वो जाकर अपनी मस्जिद बनाना चाहे तो हम भी सहयोग करने को तैयार है।  
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