3 ट्रेनों में भरकर दक्षिण भारत पहुँच गये रोहिंग्या… बदलाव की बड़ी आहट ले रहा भारत का भूगोल

भारतीय खुफिया एजेंसी आईबी ने रोहिंग्या आक्रान्ताओं को लेकर केंद्र सरकार को एक ऐसी रिपोर्ट भेजी है जिससे हलचल मच गयी है. आईबी की इस रिपोर्ट का आधार का आधार माना जाए तो रोहिंग्या आक्रान्ताओं की आड़ में भारत का भूगोल बदलने का प्रयास किया जा रहा है. आईबी की इस रिपोर्ट में रोहिंग्या शरणार्थियों के भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों से दक्षिणी राज्यों की तरफ पलायन करने की सूचना दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण में जिन जगहों पर रोहिंग्या शरणार्थियों का पलायन हुआ है, उनमें केरल और हैदराबाद प्रमुख हैं. खूफिया एजेंसियों का कहना है कि ये मूवमेंट असम के गुवाहटी से पालघाट की ओर गुवाहटी-त्रिवेंद्रम सेंट्रल एक्सप्रेस, दिल्ली से चलने वाली नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस और डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक जाने वाली विवेक एक्सप्रेस द्वारा हुई है. साथ ही पलायन करने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ आतंकी संगठन के लोग भी देखे गए हैं. खुफिया एजेंसियों ने इसे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना है.

ज्ञात हो कि बीते 26 सितंबर को रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने भी गृह मंत्रालय को रोहिंग्या शरणार्थियों के पलायन के लेकर सूचित किया था, जिसके बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गृह सचिव को कहकर केरल सरकार को अलर्ट करने का निर्देश दिया था. आरपीएफ द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थी केरल और तमिलनाडु जाने वाली 14 विभिन्न ट्रेनों में सवार हुए हैं. सरकार ने आरपीएफ को भी इस मामले में कड़ी निगरानी करने का आदेश दिया है. खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में जो सबसे चिंताजनक बात है वो ये कि आतंकी संगठन हरकत उल जिहाद अल इस्लामी के कुछ आतंकी इन रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ देखे गए हैं. बता दें कि हरकत उल जिहाद अल इस्लामी बांग्लादेश और पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन है.

सूत्रों के अनुसार, हरकत उल जिहाद अल इस्लामी के सदस्यों के अलावा रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ कुछ कट्टरपंथी लोग भी थे, जो कि शरणार्थियों को गुमराह कर अपने साथ जोड़ सकते हैं,, इसे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थी आतंकियों के लिए आसान टारगेट हैं, वो इन्हें आसानी से गुमराह कर सकते हैं. ऐसी खबरें भी मिली हैं कि कुछ लोग आतंकी संगठनों में शामिल भी हो गए हैं और उन्हें नेपाल के रास्ते ट्रेनिंग के लिए भेजा जा चुका है. हालाँकि इसे रोकने के लिए सरकार भी कदम उठा रही है. सूत्रों के अनुसार, रोहिंग्या शरणार्थियों को बांग्लादेश में ही रोककर रखने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए डिप्लोमैटिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं.

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