भारत के राष्ट्रपति से मिले रूस व चीन के विदेश मंत्री… दुबक कर देख रहा पाकिस्तान

भारत और रूस के बीच बरसो बरस से चली आ रही “आपसी भरोसे” की इसी दोस्ती का एक नया महत्वाकांक्षी अध्याय शुरू होने जा रहा है. सुत्रो ने कहा कि भारत एवं रूस के बीच द्विपक्षीय आर्थिक, वाणिज्यिक एवं निवेश संबंध बढ़ रहे हैं परंतु यह क्षमता से काफी कम हैं। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और चीन के विदेश मंत्री वैंग वाई ने आज राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से यहां मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन में लावरोव और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कोविंद ने कहा कि भारत एवं रूस के बीच द्विपक्षीय रिश्ते अत्यंत मजबूत हैं।

सूत्रो के अनुसार “2013 में रूस के साथ द्विपक्षीय व्यारपार 10 अरब अमरीकी डालर के आसपास था तथा अनुमान है कि 2014 में भी यह इतना ही रहेगा। हम व्याकपार एवं निवेश के माध्यनम से अपने आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए अनुकूल स्थितियों का सृजन करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। जानकारो के अनुसार वर्ष 2010 मे दोनो देशो ने वर्ष 2015 तक उभयपक्षीय व्यापार दुगना कर 20 अरब डॉलर करने का फैसला किया था लेकिन अब भी यह 10 अरब डॉलर पर अटका हुआ है.

इस बार होने वाली शिष्टमंडल वार्ता मे व्यापार को बढाने विशेष तौर पर निजी क्षेत्र मे व्यापार बढाने के बारे मे कई अहम फैसले लिये जाने की उम्मीद है जिससे भारत के “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम को भी बल मिलेगा.रूस मे भारत के राजदूत पी. एस राघवन के अनुसार भारत और रूस आर्थिक रिशतो को गति देने के लिये अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने की पहल पर विचार कर रहे हैं ताकि उत्पादो के द्विपक्षीय आदान-प्रदान की मात्रा बढ़ाई जा सके।

दोनो देशो की जनता के बीच संपर्क बढने और सांस्कृतिक संबंधो की चर्चा करते हुए सूत्रो ने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही में भी काफी वृद्धि हुई है। हाल ही में घोषित ई – वीजा सुविधा रूस के नागरिकों को भी प्रदान की गई है तथा उम्मीसद है कि इससे भारत आने वाले पर्यटकों की संख्याव में और वृद्धि होगी। सांस्कृेतिक आदान प्रदान भारत – रूस संबंधों का एक महत्व‍पूर्ण घटक है। इस साल भारत में ”रूसी संस्कृ्ति महोत्सघव” मनाया जा रहा है .

उम्मीद है कि शिखर वार्ता मे अगले साल रूस ‘भारतीय संस्कृरति महोत्स्व” मनाये जाने की भी घोषणा की जायेगी|
हालांकि जो मुद्दा भारत और चीन को बांटता है, वह सीमा विवाद से आगे का है। इस साल दोनों देशों के बीच आपसी उच्चस्तरीय सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि चालू वर्ष के प्रथम छह महीनों में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 22 प्रतिशत की अच्छी-खासी वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय उत्तरी-दक्षिणी परिवहन कॉरिडोर का शीघ्र परिचालन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्यों की प्राप्ति में उल्लेखनीय भूमिका निभा सकता है। राष्ट्रपति ने कहा, हम अपनी विदेश नीति में भारत-चीन संबंधों को काफी अहमियत देते हैं। दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर उच्चस्तरीय आदान-प्रदान एवं आपसी संवादों का सिलसिला जारी है। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहभागिता भी तेजी से बढ़ रही है। इसी तरह अनेक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी आपसी सहयोग देखने को मिल रहा है।

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