बेकसूर थे हिंदू समझौता ब्लास्ट में भी… पाकिस्तानी को बचाने के लिए हिंदुओं की चढ़ाई बलि

18 फरवरी 2007 को हुए समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस खुलासे में सामने आया है कि इस धमाके को पाकिस्तान के संदिग्ध लोगों ने अंजाम दिया था। इसके साथ ही यूपीए सरकार ने इस मामले को बिना पूरी जांच किए ही बीच में छोड़ दिया। खुलासे में सामने आया है कि भारती अथॉरिटी ने इस मामले में पाकिस्तानी संदिग्धों को गिरफ्तार किया और 14 दिन के अंदर ही उन्हें छोड़ दिया गया। 
इसके बाद इस केस में स्वामी असीमानंद को फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद को अमली जामा पहनाया जा सके। इन संदिग्धों में से एक आतंकी ने भारत में खतरनाक आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इस केस में गुरदीप सिंह पहले जांच अधिकारी थे जो अब रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने समझौता एक्सप्रेस में मारे गए 68 नागरिकों के संबंध में आखिरी रिपोर्ट जमा की थी। 
केंद्रीय मंत्री ने ‘हिंदू टेरर’ थ्योरी को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जांच के जरिए समझौता ब्लास्ट मामले की जांच को मोड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि मामले में हिंदू टेरर थ्योरी को प्लांट किया गया जबकि मामले के असली दोषी सीमा पार आराम से घूम रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसके आधार पर संदिग्ध पाकिस्तानी हमलावरों को छोड़ दिया गया?
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