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बाइज्जत बरी हुआ भाजपा का फायरब्रांड विधायक . उसे भी फंसाया गया था अपनी शक्ति के दुरूपयोग से

सत्ता का दुरूपयोग कहा जाय या शक्ति का घमंड पर इसे परिभाषित करना तब जरूरी हो जाता है जब जांच एजेंसी या अदालत झूठे आरोपों को नकार देती है . सबसे ख़ास बात ये है की आरोप लगे किस बात पर तो पता चलता है कि सत्य बोलने पर या सत्य दिखने पर या लोगों को जागरूक करने पर या बहुसंख्यक समाज की पीड़ा दिखाने पर . क्या उपरोक्त में से कोई भी कार्य अपराध की श्रेणी में आता है ?

मेरठ के सरधना से भाजपा विधायक श्री संगीत सोम जी को उस समय बेहद राहत की खबर मिली जब मुजफ्फरनगर में हिन्दुओं को भड़का कर दंगा करवाने के आरोप में उन्हें पुलिस के स्पेशल जांच दल ने क्लीन चिट दे दी . संगीत सोम को अपनी फेसबुक पर एक भड़काऊ वीडियो शेयर करने का आरोप झेलना पड़ रहा था . बेहद अफ़सोस की बात ये है कि दंगो का आरोप सचिन और गौरव नाम के २ भाइयों की हत्या के बजाय फेसबुक की वीडियो पर लग रहा था . 

इस मामले में संगीत सोम को लोगों को भड़काने और दंगे के लिए उकसाने का आरोपित किया गया था . पुलिस जांच में क्लीन चिट पाए जाने के बाद संगीत सोम समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है और पक्षपात के साथ एकतरफा कार्यवाही की हार भी बोला है . मुजफ्फरनगर दंगों के लिए असली दोषियों को दंड दिलाने की भी मांग इस क्लीन चिट पाए जाने के बाद जोर पकड़ सकती है . 

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