कभी चाय बेचने वाला बना था प्रधानमंत्री तो अब कचरा बीनने वाला बना मेयर.. दोनों ही भाजपा से


इसको लोकतंत्र की सच्ची खूबसूरती कहा जाय तो किसी भी हालत में गलत नही होगा.. इतने विशाल देश की बागडोर जहां नरेंद्र मोदी के हाथों में यहां की जनता ने थमाई जो कभी चाय बेचा करते थे, वहीं अब देश ने एक और बड़ा बदलाव देखा है जब तमाम बड़े बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए चंडीगढ़ के मेयर के रूप में वो व्यक्ति पदस्थ हुआ है जिसका बचपन इतनी गरीबी में बीता था कि उन्हें कभी अपने परिवार में भाई बहनों के साथ कूड़ा बीनते बीता था..

सबसे खास बात ये है कि इन दोनों मामलों में एक चीज कॉमन है और वो है भारतीय जनता पार्टी..ये दोनों लोग भाजपा से ही निकले है.. ध्यान देने योग्य है कि कचरे के ढेर से कभी कागज बीनने वाले राजेश कालिया अब चंडीगढ़ के 25वें मेयर बन चुके हैं, लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं रहा. गरीबों और अनुसूचित जाति के लिए संघर्ष करने वाले राजेश का शुरुआती जीवन गरीबी और अभावों में बीता. पिता सफाई कर्मचारी थे और माँ कचरा बीनती थी. सात भाई-बहनों का पालन-पोषण उनके लिए आसान नहीं था. ऐसे में बचपन में स्कूल के बाद राजेश कालिया अपने भाई-बहनों के साथ डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड में कूड़े से कागज बीनते थे. यहां से मिलने वाले सामान को इकट्ठा कर उसे बेचते थे. उससे होने वाली आय से पिता को मदद मिलती थी. उससे वह अपने परिवार का पेट पालते थे.

सोनीपत के एक छोटे से गांव में जन्म लेने वाले राजेश कालिया ने ज़ी मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था एक दिन वह चंडीगढ़ में मेयर की कुर्सी को संभालेंगे. बचपन से ही राजनीति में रुझान होने के चलते कालिया धीरे-धीरे भाजपा नेताओं के संपर्क में आए और अब पार्टी के वफादार वर्कर बन गए. बीजेपी की ओर से कालिया को पहले पार्षद और अब मेयर बनाकर इसका इनाम भी दिया गया. राजेश कालिया का कहना है कि आज मैं जो कुछ भी हूं, यह सब बीजेपी की देन है. बीजेपी ही एक ऐसी पार्टी है, जो चाय वाले को प्रधानमंत्री और कूड़ा बीनने वाले को मेयर बना सकती है.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...