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नक्सलियों को बताया जाता था किसी और मजहब का.. तो आताउर, अब्दुल, अंसारी, इसराफिल, कलाम, आलमगिर, मोनिन, कादिर कौन हैं ?

अक्सर नक्सलियों के नाम आदि के बहाने किसी अन्य पर निशाना साधते देखा होगा आपने .. उसको एक धार्मिक उन्माद आदि साबित करने के कुतर्क भी देखे और सुने होंगे आपने.. ये अक्सर उनके द्वारा किया जाता है जो आतंक का कोई धर्म नहीं आदि की बातों को किसी भी रूप में साबित करने के प्रयास किया करते हैं . लेकिन अब जो कुछ भी निकल कर सामने आ रहा है वो किसी को भी हैरान कर देने वाला है और आतंक के एक ही रूप को चेहरे बदल कर सामने आते दिखाएगा .

उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित पटाखा कारखाने में हुए विस्फोट में मारे गए पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले नौ लोगों की भूमिका जांच में संदिग्ध पाई गई है। रविवार को घटनास्थल से ग्रेनेड बरामद होने के बाद विस्फोट मामले में नया मोड़ आया है। पता चला है कि मृतक साधारण मजदूर न होकर ग्रेनेड जैसे खतरनाक बम बनाने में प्रशिक्षित थे। जहां विस्फोट हुआ था, वह पटाखे की एक दुकान थी। बाद में पता चला कि वहां पटाखे बनाए जाते थे। अब वहां से ग्रेनेड बरामद किए गए हैं जो अमूमन सेना या माओवादियों अथवा आतंकियों के पास होते हैं। एक साधारण से गांव के पटाखा कारखाने में ग्रेनेड कहां से आया, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बड़ा सवाल यह है कि इसे तैयार करने के लिए पुख्ता प्रशिक्षण की जरूरत होती है, जो बम बनाने के एक्सपर्ट ही कर सकते हैं, लेकिन ऐसा प्रशिक्षण आतंकी दे सकते हैं या फिर माओवादी। ऐसे में मारे गए नौ लोग संदिग्ध हैं और उन्हें साधारण मजदूर के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। मरने वालों में आताउर मोमिन, अब्दुल गफ्फार , मोहम्मद सुभान अंसारी , इसराफिल, अब्दुल कलाम , आलमगिर मोमिन, आजाद मोनिन , अब्दुल कादिर और मोसौउर शामिल हैं।

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