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अदालत ने पूछा था कि- “जनता का पैसा मूर्तियों पर क्यों खर्च किया” ? तो ये रहा मायावती का जवाब

ये ऐसा सवाल था जिसको अदालत के माध्यम से कई लोगों ने जानना चाहा था . जनता का वो पैसा जो सरकारी अस्पताल और स्कूल अदि के लिए खर्च होना था उस पैसे को बड़ी बड़ी मूर्तियों आदि में लगाना और पार्कों का सौन्दर्य बढाने के साथ साथ उसमे अपनी और अपने चुनावी निशान की मूर्तियाँ लगवाना, कहीं न कहीं जनता के मन में अपने पैसे का दुरूपयोग करने जैसा लग रहा था . उनकी आवाज को उस समय बल मिला था जब अदालत ने भी वही सवाल किया मायवती से ..

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विदित हो कि बहुजन समाज पार्टी ने अदालत को अपना जवाब दे दिया है जिसमे उनसे सवाल किया गया था कि उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में जनता का पैसा पार्कों में मूर्तियाँ लगवाने में क्यों किया है . उनका जवाब भी बेहद अजीब है जो शायद कुछ के गले न उतरे .. चुनावी घमासान में समाजवादी पार्टी के साथ उतर चुकीं बीएसपी प्रमुख मायावती ने हाथी की प्रतिमाओं पर पैसा खर्च करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिया है।

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अपने हलफनामें में बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने तत्कालीन सरकार द्वारा मूर्तियों की स्थापना को सही ठहराया है। उन्होंने कहा है कि मूर्तियां लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती हैं।मायावती ने इसके साथ ही कहा कि पैसा शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए या अस्पताल पर यह एक बहस का सवाल है और इसे कोर्ट द्वारा तय नहीं किया जा सकता है। उन्होंने हलफनामे में कहा है कि लोगों को प्रेरणा दिलाने के लिए स्मारक बनाए गए थे ..

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