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सबरीमाला की रक्षा करते हिंदुओं को बताया गया साम्प्रदायिक लेकिन जब उसी केरल में एक अबोध बालिका ने स्कूल में पढ़ी अज़ान तो हुआ ये हाल … क्या यही है वामपंथी सिद्धांत ?

ज्यादा समय नही हुआ अभी केरल के विवाद को .. कहना गलत नही होगा कि अभी पूरी तरह से निबटा भी नही लेकिन हिन्दू समाज पर साम्प्रदायिक, उन्मादी, रूढ़िवादी और भी न जाने क्या क्या आरोप लग गए  . उस समय वामपंथी शासन ने भी पुलिसिया जोर दिखाया था और उसी जोर के चलते कई हिन्दू अब तक जेलों में हैं ..लेकिन उसी वामपंथ शासित केरल में जब एक स्कूल के नाटक मंचनक दौरान एक अबोध बालिका ने अज़ान का मंचन किया तो उसको एहसास करवा दिया गया कि मज़हबी मामले क्या होते हैं . अब न ही मीडिया के उस खास वर्ग में हलचल है और न ही बुद्धिजीवयों के उस खास समूह में किसी प्रकार की कोई चर्चा .. स्वालब वामपंथी सिद्धांत पर भी उठने शुरू हो चुके हैं ..

केरल में जहां सबरीमाला मंदिर मामले को लेकर विवाद चल ही रहा है कि कोझिकोड़ में मुस्लिमों का विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गया है। हैरान करने वाली बात है कि मुस्लिमों के विरोध प्रदर्शन की वजह बस इतनी है कि एक छात्रा ने स्कूल में नाटक प्ले के दौरन अजान पढ़ दिया। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि इस्लाम में नमाज से पहले प्रार्थना की जाती है। वह भी इसे पुरुष मुकरी या फिर मोअज्जिन ही पढ़ सकते हैं। नाटक किताभ में जिस तरह से लड़की ने नमाज पढ़ी है, यह मुस्लिमों की खुले तौर बेइज्जती है.

बताते चलें कि मेमूंडा हायर सेकेंडरी स्कूल में नाटक किताभ का आयोजन किया गया था। यहां कि छात्रों ने ही इस नाटक को मंच पर चरितार्थ किया। नाटक लेखक आर उन्नी की कहानी पर आधारित था। गत बुधवार को वडाकारा में आयोजित जिला स्कूल आर्ट्स फेस्टिवल के दौरान नाटक का मंचन छात्रों ने किया था। नाटक में दिखाया गया है कि मुकरी की बेटी अजान पढ़ना चाहती है। पिता से पूंछने पर पहले तो वह मना करते हैं, लेकिन बाद में इजाजत दे देते हैं.

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के स्थानीय नेता सलीम पी अज्हीयूर ने नाटक को लेकर कहा कि इसे सामाजिक आलोचना कदापि नहीं माना जा सकता है। लेकिन इस नाटक के माध्यम से मुस्लिमों की बेइज्जती हुई है। शिक्षा उप निदेशक को शिकायत भेज दी गई है। इस स्कूल को सीपीएम चलाता है। ऐसे में पार्टी का ऐजेंडा नाटक को लेकर क्या है, यह भी साफ हो जाता है। यह पार्टी मुस्लिम समुदायों के बारे में गलत बातें और मैसेज भेजने का काम करता है। कुल मिला कर एक अबोध बालिका के विरुद्ध इस प्रकार की बातें उसको सहमा देने के लिए काफी है और उतनी ही दर्दनाक इस मुद्दे पर बुद्धिजीवयों की खामोशी..

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