सेकुलर भारत में 10 साल बाद रिहा कर दिया गया पाकिस्तानी जासूस इब्राहिम खान जबकि दारा सिंह 21 वर्ष बाद भी काटेगा जेल


भारत वर्ष का सेकुलर कानून एक बार फिर से करने जा रहा है न्याय जिसकी गवाह भारत की धर्मनिरपेक्ष जनता होगी .. इस बार एक पाकिस्तानी रिहा किया जाने वाला है जिसके पास से भारत के तमाम नक्शे अदि बरामद हुए थे और एक लम्बी मेहनत के बाद ATS दस्ते ने उसको गिरफ्तार किया था . अब वही पाकिस्तानी 10 वर्ष बाद रिहा कर के अपने देश वापस भेजा जा रहा है .. उसको एक थाने में बाकायदा रखा गया था बीच में जहाँ उसका पूरा ध्यान रखा जाता था .

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बता दे कि वकास अहमद 2005 में दिल्ली में भारत-पाकिस्तान के बीच मैच देखने के बहाने भारत में आया था। इसके बाद वापस नहीं गया और संदिग्ध हरकतों में शामिल हो गया . उसकी हरकतों पर नजर रखते हुए मई 2009 में एटीएस के तत्कालीन इंस्पेक्टर ने वकास को कानपुर महानगर में मंधना स्थित एक साइबर कैफे से दबोचा था।उसके पास से भारत का नक्शा, कई गोपनीय दस्तावेज और सेना के मूवमेंट से जुड़े कागजात मिले थे। भारत की अदालत ने वकास अहमद उर्फ़ इब्राहीम खान को 10 साल की सजा सुनाई थी।

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14 मई को वकास पाकिस्तानी अफसरों को सौंप दिया जाएगा। इब्राहीम खान जैसे देश के दुश्मनों को तो रिहा कर दिया जाता है लेकिन 21 साल से उड़ीसा की जेल में बंद दारा सिंह के कोई आवाज तक नहीं उठती. धर्मांतरण के खिलाफ बुलंद आवाज बन कर दुनिया भर में प्रसिद्ध हुआ दारा सिंह शायद ही इस जन्म में अब अपनी सांस स्वतंत्र हवा में ले सके क्योकि उसको छोड़ने के लिए तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के वो सिद्धांत आड़े आ रहे हैं जो दारा पाकिस्तानी इब्राहीम खान को तो छोड़ सकते हैं लेकिन दारा सिंह को नहीं..

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क्या दारा के लिए होली दिवाली नहीं बनी है.. , पाकिस्तानी इब्रहिम का ध्यान जरूर रखा गया, उसकी सजा के खिलाफ ऊपर अपील तक नहीं की गई और उसकी रिहाई ससम्मान हो इसका सरकार ने उनका ध्यान रखा लेकिन जिस दारा के माता पिता एक एक कर के चल बसे उस दारा को उनके अंतिम संस्कार तक में जाने का समय नहीं दिया गया .. अगर दारा सिंह ने इब्राहीम खान की रिहाई की खबर सुनी होगी तो उसके मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि उसमें और इब्राहिम में मजहब के अलावा और क्या अंतर है.

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