प्लान था कमलेश तिवारी के सर को धड़ से अलग करने का.. फिर जारी होती एक वीडियो


हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी के दोनों हत्यारे अशफाक तथा मोइनुद्दीन गिरफ्तार हो चुके हैं तथा उनसे पूंछताछ जारी है. अशफाक तथा मोइनुद्दीन से पूंछताछ में चौकाने वाला खुलासा हुआ है. करीब छह घंटे तक लगातार चली ‘इंट्रोगेशन'(पूछताछ) में कई ऐसे सच सामने आये जिनसे अब तक पुलिस रूबरू नहीं हो सकी थी. एटीएस और एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपियों ने पूछताछ में काफी कुछ उगला तथा ऐसी बातें बताईं जो बेहद ही चौंकाने वाली हैं. दोनों ने कबूला है कि वह कमलेश तिवारी का गला काटकर उसका वीडियो बनाने वाले थे ताकि उसे सोशल मीडिया में वायरल कर सकें.

अशफाक तथा मोइनुद्दीन ने पूंछताछ में कबूला है कि 18 अक्तूबर की सुबह 10:38 पर जब दोनों लोग भगवा वेश में खुर्शेदबाग के लिये निकले थे तो रास्ते में एक दरगाह देखकर वह इबादत करने चले गए थे. फिर यहां से वह पता पूछते हुए कमलेश के घर की तरफ चल दिये थे. यहीं रास्ते में लाल कुर्ता पहने महिला मिली थी जिससे उन्होंने पता पूछा था. इस महिला ने भगवा कपड़े देखकर कहा था कि चलो, मेरे साथ चुनाव का प्रचार करो. महिला ने खुद को अल्पसंख्यक मोर्चा का पदाधिकारी बताया था.

इसके बाद दोनों ने जांच अधिकारियों से जो बात कही वो बेहद ही चौकाने वाली थी. दोनों ने यह कहकर अफसरों को चौंका दिया कि उन्हें कमलेश का गला काटकर धड़ से अलग करना था फिर इसे हाथ में लेकर वीडियो वायरल करना था. ऐसा कहकर वह लोगों को चेताना चाहते थे कि अब कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिये. पर, वहां घायल होने और पकड़े जाने के डर से पूरी तरह से गला नहीं रेत सके थे.

मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, पूंछताछ में अशफाक ने बताया है कि जब वे लोग कमलेश के घर पहुंचे तो नीचे दफ्तर में उनका सुरक्षाकर्मी सो रहा था. नीचे कोई नहीं था. वह जीना चढ़ने लगे, तभी ऊपर से कर्मचारी सौराष्ट्र आ गया, उससे कमलेश ने पहले ही बता रखा था कोई आने वाला है. लिहाजा वह ऊपर बेरोकटोक चले गए. यहां उन्हें दफ्तर नुमा एक कमरे में बैठा दिया गया. अफशाक और मोइनुद्दीन ने बताया कि मेहमान बनकर कमलेश से मिलने गए थे, इसलिये वह लोग सूरत से मिठाई लेकर आये थे. इस बात को उन्होंने गलत बताया कि डिब्बे में पिस्टल व चाकू ले गए थे.

दोनों ने कबूला है कि डिब्बे में आधा किलो मिठाई ही थी. अशफाक ने पिस्टल ले रखी थी साथ ही दोनों ने खुला चाकू पैंट में लगा रखा था. इसके बाद दोनों ने जो कहा वो और भी चौंकाने वाला तथा उनके खतरनाक जिहादी इरादों से पर्दा उठाने वाला था. दोनों ने बताया है कि मिठाई के डिब्बे में रसीद निकालने के पीछे कोई वजह नहीं थी. वह तो चाहते ही थे कि उनका नाम सामने आये. हत्यारों ने बताया कि जब कमलेश उनसे मिलने कमरे में आये तो वह उनसे ठीक से बात नहीं हो पा रही थी. वे लोग बात शुरू करते, बीच में ही कभी उनके फोन आ जाते तो कभी वह फोन करने लगते थे.

बीच-बीच में कई बार कमलेश तिवारी ने यह कहा कि काम बहुत बढ़ गया है. पार्टी का बड़ा सम्मेलन करना है. इससे वह लोग झुंझला भी रहे थे. अशफाक ने बताया कि गोली उसे ही चलानी थी, लिहाजा जब हमला किया तो पहले उन्हें अचेत करने के लिये चाकू से गर्दन पर सामने की ओर से सीधा वार किया. इससे उनकी चीख थोड़ी सी ही निकली. फिर मोइनुद्दीन ने मुंह दबाया और उसने गोली चलायी. यह गोली पहले मोइनुद्दीन के हाथ में लगी, फिर कमलेश के जा धंसी. इस दौरान कमलेश का गला भी रेता था. चाकू से उसका हाथ भी छिल गया था.

पूंछताछ में दोनों ने कबूला है कि चोट लगी होने की वजह से दोनों लोगों ने चोटिल हाथ को जेब में डाला और चौराहे की तरफ भाग निकले. चौराहे पर ही एक मेडिकल स्टोर से अशफाक ने डेटॉल, मरहम-पट्टी खरीदी. यहां से होटल गए और कपड़े बदल कर 16 मिनट में ‘चेक-आउट’ किये बिना बाहर आ गए. अशफाक ने बताया कि बरेली जाना उनके प्लान में नहीं था. उन्होंने कहा था कि वह सबको जताना चाहते थे कि जो भी उनकी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचायेगा, उसे खत्म कर दिया जायेगा. यही वजह थी कि वह हर जगह अपनी असली आईडी ही लगा रहे थे.

दोनों ने बताया है कि वारदात के बाद उन्होंने लखनऊ में मीडिया के सामने अथवा किसी थाने में समर्पण करने की योजना बना रखी थी. पर, हमले में घायल हो जाने की वजह से उन्हें लगा कि अब समर्पण किया तो इलाज भी नहीं कराया जायेगा. इसके बाद ही उन्होंने नागपुर में आसिम अली और सूरत में रशीद से बात की तो उन्हें बरेली जाने को कहा गया. आसिम ने हर मदद दिलाने की बात कही थी. अशफाक ने ये भी बताया है कि हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी के अलावा यूपी अध्यक्ष गौरव गोस्वामी, सूरत के ही एक नेता और लखनऊ में विवादित बयान देने वाले उसके संप्रदाय के ही एक व्यक्ति निशाने पर थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका.


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