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श्रीराम पक्ष के दिए नक्शे को फाड़ कर बाबर समर्थको ने संकेत दिए आने वाले कल में अपने मन में छिपी मंशा का


निश्चित हार की तरफ बढ़ते दिखाई दे रहे और तथ्यहीन व् आधारहीन प्रमाणों के साथ निचली अदालत से ले कर उच्चतम न्यायालय तक जाने वाले बाबर समर्थको ने आखिरकार मन्दिर के पक्ष में सम्भावित फैसला आने के बाद अपने मन में छिपी मानसिकता को एक बेहद निम्न कोटि की हरकत से सबके आगे रख ही दिया.. इस से पहले यही बाबर के पक्ष वाले भगवान श्रीराम व् हिन्दू आस्थाओं के ऊपर जितना प्रहार कर सकते थे , उन्होंने किया था और सब कुछ काल्पनिक बता डाला था..

जैसे ही प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई की अंतिम तारिख आज 5 बजे तक समय के साथ घोषित की वैसे ही इस मामले को लम्बा खींचने के बाबर पक्ष के मंसूबे स्वतः ही ध्वस्त हो गये और उन्होंने हडबडी में तमाम ऐसे काम करने शुरू कर दिए जो किसी भी रूप में कानूनी नही कहे जा सकते हैं . बाबर पक्ष के वकील राजीव धवन ने कोर्ट रूम में ये नक्शा फाड़ा है जिसे हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने दिया था। बता दें कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई हो रही है।

राष्ट्र की पहली मांग के रूप में चल रहे श्रीराम के मन्दिर मामले की सुनवाई शुरु होने पर सबसे पहले रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अपनी दलीलें पूरी की। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि 1857 से 1934 और उसके बाद भी जन्मभूमि की हिंदू लगातार पूजा करते रहे हैं.. रंजीत कुमार ने कहा कि कैलाश मानसरोवर में मूर्ति की नहीं पूरे पहाड़ की पूजा होती है। हिंदुओं में कण-कण में भगवान की मान्यता है। रंजीत कुमार के बाद धर्मदास की तरफ से जयदीप गुप्ता ने दलीलें दीं।


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