UP के जालौन जिला प्रशासन ने दिखाया तालिबानी अंदाज़.. नहीं आयोजित होने दिया पतंजलि का योग शिविर

ये वो समय था जब केंद्र और राज्य की सत्ता के एक एक सत्ताधीश आम जनमानस से घरों से निकल कर योग करने और अपने जीवन को सुखमय बनाने की अपील कर रहे थे.. उस दिन पूरा भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देश अपने अपने राष्ट्राध्यक्षो के नेतृत्व में जगह जगह योग कर रहे थे..भारत मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , पूरा केंद्रीय मंत्रिमंडल योग कर रहा था तो उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , पूरी प्रदेश सरकार और जिलों में प्रशासनिक अधिकारी योग करते देखे गए.. योग दिवस पर कई दिनों पहले से ही जन जन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किये जा रहे  थे लेकिन अगर कहीं कोई इस आयोजन के खिलाफ खुल कर खड़ा था तो वो था उत्तर प्रदेश के जिला जालौन का प्रशासन.. यहां जो हुआ उसके बाद जल्द विश्वास करना मुश्किल होगा कि जालौन जिला प्रशासन क्या योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ही शासित है ?

ध्यान देने योग्य है कि जालौन जिला प्रशासन ने पतंजलि संस्था के योग शिविर के प्रायोजित कार्यक्रम की अनुमति को खारिज कर के हर किसी को चौंका दिया .. यहां पर जिला प्रशासन ने पहले से प्रस्तावित उस पतंजलि के योग शिविर को लगाने से मना किया जो योगगुरु स्वामी के नेतृत्व में भारत के जन जन तक योग की महिमा पहुँचा रही है.. जिला प्रशासन ने पतंजलि के योग शिविर को न आयोजित होने देने के पीछे कोई ठोस कारण नही बताया जिस से साफ जाहिर होता है कि ये निर्णय किसी व्यक्तिगत विद्वेष से लिया गया है..इस से पहले जालौन जनपद मज़हबी उन्मादियों के आतंक और साम्प्रदायिक तनाव आदि के लिए चर्चित रहा है..माना ये भी जा रहा है कि योग का विरोध करने वाले एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने ऐसा फैसला लिया था..

बताया जा रहा है की जालौन जिला प्रशासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को दिनांक 20 जून 2019 की रात को सख्ती से कुचल दिया गया.. टाउन हॉल मैदान उरई उत्तर प्रदेश मध्य जालौन पतंजलि परिवार के तरफ से किया जा रहा था जिसे प्रशासन द्वारा जबरन बंद करा दिया गया. प्रशासन के पक्षपाती कहर का शिकार हुए पतंजलि परिवार का कहना है कि उन्हें जिला प्रशासन से मौखिक आदेश मिला कि वो सरकार के साथ मिलकर कार्यक्रम करें और पतंजलि संगठन का अंतरराष्ट्रीय योग दिवस नहीं मना सकते यही कारण है.. आगे उन्होंने कहा हमारे प्रचार से प्रशासन ने समझा कि उनका कार्यक्रम फेल हो जाएगा उनके कार्यक्रम में लोग नहीं पहुंचेंगे इसीलिए उन्होंने अनुमति रद्द कर दी..यद्द्पि ये कुतर्क एक बहाना माना जा रहा है कार्यक्रम रद्द करने का..इसी के साथ ये सवाल खड़ा होता है कि जिस प्रदेश में इत्सेमा आदि के आयोजन की अनुमति सरलता से मिल जाया करती है वहां पर योग दिवस के मौके पर पतंजलि जैसी राष्ट्रभक्त संस्थाओ की अनुमति निरस्त करना कहाँ तक उचित है ..जिला प्रशासन के इस फैसले का आम जनमानस भी व्यापक विरोध कर रहा है..

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