व्यभिचार क़ानून मुद्दे पर जनता प्रतीक्षा कर रही थी महिला आयोग के बयान का.. बयान आया भी लेकिन ऐसा

ये कानून हट जाना भारत के धर्मपरायण और परिवार के एकीकरण को चाहने वाले लोगों गले से नहीं उतर रहा था . इस कानून के तहत ऐसा डर था जिसमे एक विवाहित जोड़ा एक दूसरे से किसी भी रुप में जुड़ा रहना चाहता था जो कई बार परिवार को टूटने से बचाता था लेकिन अचानक ही सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को खत्म कर के भारत की संस्कृति की दिशा ही मोड़ दी है . हैरानी की बात ये रही कि इस पर किसी बड़े नेता ने प्रतिक्रिया नहीं दी  जो ये साबित करती है की वो सभी सहमत हैं और खुश हैं लेकिन कम से कम महिला आयोग से प्रतीक्षा थी एक सकारात्मक प्रतिउत्तर की . वो महिला आयोग जो रेखा शर्मा जी के नेतृत्व में चल रहा है .. उनका बयान आया भी इस मुद्दे पर लेकिन जो आया वो किसी को भी चौंकाने वाला था .

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा ने मीडिया को दिए गये इन्टरव्यू में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं धारा 497 को निरस्त करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करती हूं। यह ब्रिटिशकालीन कानून था। अंग्रेजों ने इससे बहुत पहले ही मुक्ति पा ली थी, लेकिन हम इसे लेकर चल रहे थे। इसे बहुत पहले ही खत्म कर देना चाहिए था।’’ इतना ही नहीं आगे उन्होंने इस फैसले पर कहा, ‘‘महिलाएं अपने पतियों की संपत्ति नहीं हैं। यह फैसला न सिर्फ सभी महिलाओं के हित में है, बल्कि लैंगिक तटस्थता वाला फैसला भी है।’’ उन्होंने बाकायदा अपने बयान को अपने ट्विटर पर शेयर भी किया है .

ध्यान देने योग्य है कि एक बेहद अप्रत्याशित फैसले में उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने व्यभिचार के लिए दंड का प्रावधान करने वाली धारा को सर्वसम्मति से असंवैधानिक घोषित किया। न्यायमूर्ति मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति डी. वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पीठ ने गुरुवार को कहा कि व्यभिचार के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 497 असंवैधानिक है।

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