राष्ट्रभाषा हिंदी का मजाक उड़ाया कांग्रेस ने.. ऐसा मजाक जिसे दुनिया बना सकती है हथियार

हिंदुस्तान जैसे देश को एक भाषा से सहारे संबोधित करना हो तो वह सिर्फ हिन्दी ही है. यह हिन्दी का अहंकार नहीं उसकी सहजता और ताकत है.लोकसभा में बुधवार को कांग्रेस नेता शशि थरूर और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीच हिंदी को लेकर दिलचस्प बहस देखने को मिली.दरअसल शशि थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा के तौर पर मान्यता दिए जाने का मामला उठाया. जहां थरूर ने कहा कि यूएन में हिंदी को आधिकारिक भाषा के तौर पर मान्यता एक व्यर्थ प्रयास है.मौजूदा समय में हमारे पीएम और विदेशमंत्री हिंदी बोलते हैं,

भविष्य में कोई गैर हिंदी भाषी व्यक्ति पीएम और विदेश मंत्री बन जाएगा. साथ ही विदेश मंत्री ने कहा कि हम यूएन में हिंदी को आधिकारिक भाषा के तौर पर मान्यता दिलाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए दो-तिहाई वोटिंग की जरूरत होती है.बता दें कि संयुक्त राष्ट्र यूएन में एक भाषा को आधिकारिक मान्यता के लिए सदस्य देश को इसके लिए भुगतान करना होता है.शशि थरूर के सवालों पर विदेशमंत्री ने जवाब में कहा कि कांग्रेस नेता को जानकारी नहीं है.

अगर वे सोचते हैं कि हिंदी केवल भारत में बोली जाती है, तो वे गलत सोच रहे हैं. हिंदी को फिजी में भी आधिकारिक भाषा के तौर पर मान्यता प्राप्त है. थरूर के बयान से तो लगता है कि कांग्रेसी नेताओं को इसकी जानकारी नहीं है. आगे सुषमा ने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीय भी हिंदी बोलते हैं.आज हम जिस भाषा को हिन्दी के रूप में जानते है, वह आधुनिक आर्य भाषाओं में से एक है. भाषा नदी की धारा के समान चंचल होती है.यह रुकना नहीं जानती, यदि कोई भाषा को बलपूर्वक रोकना भी चाहे तो यह उसके बंधन को तोड़ आगे निकाल जाती है.यही भाषा की स्वाभाविक प्रकृति और प्रवृत्ति है.

Share This Post

Leave a Reply