उग्र हिंदुत्व पर फिर लौटी शिवसेना. दो टूक में बोला- राम मंदिर पर अदालत कौन होती है बोलने वाली…

राम जन्म भूमि अयोध्या में राम मंदिर एक ऐसा मुद्दा है जिससे सरकारों को बनता भी देखा गया है और गिरते हुए भी। कई दशक बीत गए लेकिन फैसला अभी तक नहीं हो पाया कि राम जन्म भूमि पर राम मंदिर बने या बाबरी मस्जिद। हाल ही में 2017 में सर्वोच अदालत द्वारा राम मंदिर पर फैसला सुनाया गया जिसमें अदालत ने कहा कि भाजपा, शिवसेना, तथा विश्व हिन्दू परिषद् के नेताओं को 1992 में बाबरी मस्जिद को ढाहने की साजिश में मुक़दमे का सामना करना पड़ेगा। 
इस फैसले पर शिवसेना के संसद संजय राऊत ने अदालत के फैसले को मैंने से साफ़ इंकार कर दिया हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने राम मंदिर आंदोलन कोर्ट से पूछकर नहीं किया तो वो कोर्ट का फैसला क्यों माने। इससे पहले भी कई बार राम मंदिर विवाद पर अदालतों ने कई फैसले सुनाये। समितिओं ने मालिकाना हक़ के लिए भी कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया। जब फ़ैज़ाबाबाद जिला न्यायधीश ने राम जनम भूमि अयोध्या में स्तिथ बाबरी ढांचे में राम पूजा की इजाजत हिन्दुओं को दी तो मुस्लिमों ने विरोध करना शुरू कर दिया। 
जिसके बाद एक बार फिर मंदिर मस्जिद की लड़ाई शुरू हो गयी। कुछ पार्टियों ने राम जन्म भूमि पर राम मंदिर का समर्थन किया तो कुछ ने मस्जिद का। कहा जाता है कि बाबर ने अपने राज में राम मंदिर तुड़वा कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया था। जिसका विरोध तब भी किया गया था. लेकिन फैसला अभी तक नहीं हो पाया। राम जन्म भूमि पर राम मंदिर बने या मस्जिद? ये एक ऐसा सवाल बनकर रह गया है जिसका जवाब मिलना इतना आसान नहीं हैं।
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