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उन्हें जेल भी भेजो तो ये होता है दुष्परिणाम.. जबकि मृत्युदंड के खिलाफ हैं कथित मानवाधिकारी

ये वो खबर है जिसे पढ़कर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे. मजहबी जिहाद के नाम पर अत्नको हमलों को अंजाम देने वाले इस्लामिक आतंकियों को जब गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाता है, तब जेल के अंदर ये आतंकी क्या करते हैं, इसे लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ है. इस खुलासे के बाद उन कथित मानवाधिकारियों व बुद्द्धिजिवियों की जुबान पर ताला लग गया है जो इन आतंकियों के मृत्युदंड के खिलाफ तनकर खड़े हो जाते हैं, आधी रात को कोर्ट खुलवा लेते हैं.

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खबर के मुताबिक़, देश के खिलाफ आतंकी हमले से लेकर आतंकी साजिश में पकड़े गए खतरनाक आतंकियों से अब आम कैदियों को भी खतरा है. खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि देश भर की जेलों में बंद आतंकी आम कैदियों को जेहादी बना रहे हैं. ऐसे में गृह मंत्रालय ने फैसला किया है कि जल्द ही सभी राज्यों से कहेगा कि वो आतंकियों को आम कैदियों से अलग करें और देश भर की अलग अलग जेलों में सज़ा काट रहे आतंकियों के लिए एक अलग जेल बनाई जाए. जिससे आम कैदियों को उनसे दूर रखा जाये.

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मिली जानकारी के मुताबिक कई राज्यों के पुलिस प्रमुखों के साथ हुई बैठक में ये फैसला लिया गया है कि हर राज्य में एक हाई सिक्यूरिटी प्रिजन बनाई जायेगी और इसमें बाकी जेलों में बंद आतंकियों को शिफ्ट किया जायेगा.’ हमारे पास जो जानकारी है उसके मुताबिक पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जिसमें आतंकी आम कैदियों को ब्रेनवाश कर या तो आतंकी बना रहे हैं या फिर उन्होनें कइयों को जेहादी बना दिया है.

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गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों की पुलिस से कहा है कि वो आम कैदियों से आंतकवादियों को अलग करें. सभी राज्यों में एक हाई सिक्यूरिटी जेल बनाने को लेकर सरकार गंभीर है.’ गृह मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी के मुताबिक श्रीनगर,जम्मू और दिल्ली के तिहाड़ जेल समेत देश के कई जेलों में आतंकियों को रखा गया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक ये देखा गया कि इन जेलों में बंद आतंकियों के साथ रह रहे कुछ आम कैदी भी जेल से बाहर आने के बाद आतंकी बन गए. कुछ का आतंकियों ने  ब्रेनवाश कर उन्हें जेहादी बना दिया.

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खुफियों एजेंसियों को जानकारी मिली है कि जेलों में एक साथ बंद रहने से कई आम कैदियों की इन आतंकियों से दोस्ती हो जाती है. कई बार आतंकी आम कैदियों को अपने मास्टरमाइंड  से उनकी जान पहचान करा देते हैं. जेल से बाहर आते ही छोटे मोटे अपराध के तहत जेलों में बंद ये आम कैदी खतरनाक आतंकी बन जाते हैं. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक सबसे ज्यादा रेडिक्लाइजेशन का खतरा श्रीनगर और जम्मू के जेलों से हैं. पिछले साल जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने श्रीनगर के सेंट्रल जेल में छापे डाल कर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया तो जेल से पाकिस्तानी झंडा, लश्कर और हिजबुल के पोस्टर और कई जेहादी सामग्रियां मिली. इन जेलों में बंद आतंकी कम उम्र के कैदियों को पाकिस्तान भेज कर आतंकी ट्रेनिंग दिलाते थे

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