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हिंदुओं के पवित्र तीर्थ मथुरा व काशी में बनी मस्जिदों पर भी शुरू हुआ मंथन.. कभी लगते थे नारे- “मथुरा काशी बाकी है”

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मामले की नियमित सुनवाई जारी है तथा उम्मीद जताई जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर फैसला सुना देगा. अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मामले पर चल रही नियमित सुनवाई के बीच हिन्दुओं के पवित्र तीर्थ काशी तथा मथुरा में बनी मस्जिदों पर भी मंथन शुरू हो गया है. सभी जानते हैं कि देश में लम्बे समय तक “अयोध्या तो एक झांकी है- काशी मथुरा बाकी है” जैसे भी नारे भी लगते रहे हैं तथा अभी भी लोगों के जेहन में बसे हुए हैं.

अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले के बीच काशी तथा मथुरा को चर्चा का केंद्र बिंदु बनाया है बीजेपी के फायरब्रांड हिन्दू राष्ट्रवादी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने.  भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अयोध्या में बड़ा बयान देते हुए कहा कि अयोध्या के साथ काशी और मथुरा दोनों स्थानों पर मस्जिद को हटाने के लिए मुस्लिमों को अलग जमीन देने का प्रस्ताव दिया जाएगा. स्वामी ने कहा कि रामजन्मभूमि के बाद अगला मिशन काशी-मथुरा की मुक्ति होगी. अयोध्या के साथ ही काशी और मथुरा हिंदुओं के पवित्र और पूजनीय स्थल हैं, इसलिए इन दोनों स्थानों पर मस्जिद को हटाने के लिए मुस्लिमों को अलग जमीन देने का प्रस्ताव दिया जाएगा.

स्वामी ने कहा कि कहा कि आस्था का जिक्र संविधान में किया गया है. हिंदू पक्ष की यह आस्था है कि ध्वस्त बाबरी मस्जिद के बीच वाले गुंबद का जो हिस्सा है, वहीं रामलला का जन्म हुआ था. स्वामी ने कहा, ‘पूजा करना हमारा मूलभूत अधिकार है, जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड आस्था के आधार पर मुकदमा नहीं लड़ रहा है. बोर्ड यह नहीं कह रहा है कि वह दोबारा मस्जिद बनाना चाहता है. वह कह रहा है कि ये जमीन बाबर की है, जबकि मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई, जो शिया था.’ उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई कर रही पीठ के पांचों न्यायाधीश विद्वान हैं, इसलिए जो फैसला आएगा, वह निष्पक्ष होगा. स्वामी ने उम्मीद जताई है कि रामजन्मभूमि विवाद पर फैसला 15 नवंबर तक आ जाएगा.

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