पहली बार वायुसेना प्रमुख ने बताई फौज की वो पीड़ा जिसे सड़क से संसद तक वोट के लिए हथियार बना चुके हैं कुछ लोग

आखिरकार भारतीय वायुसेना की वो पीड़ा बाहर आ ही गई, जिसे वह काफी लंबे समय से छिपाए थे.. वो भारतीय वायुसेना जिसने हर बार दुश्मन के नापाक इरादों को अपने शौर्य तथा पराक्रम से कुचला है तथा हिंदुस्तान की शान बढ़ाई है. 26 फरवरी को भी सिर्फ भारत ने नहीं पूरी दुनिया ने भारतीय वायुसेना के शौर्य को देखा जब उसने पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट में इस्लामिक आतंकी संगठन जैश के अड्डों पर एयरस्ट्राइक किया तथा 300 से ज्यादा इस्लामिक आतंकियों को मार गिराया है.

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बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद अब वायुसेना ने अपने उस दर्द को देश से साझा किया है, जिसे संसद से लेकर सड़क तक वोट पाने का हथियार बनाया जा रहा है. जी हाँ.. हम बात कर रहे हैं लड़ाकू विमान राफेल की.. राफेल विमान को लेकर वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान अगर समय पर भारतीय वायुसेना में शामिल हो जाते, तो पाकिस्‍तान के बालाकोट एयर स्‍ट्राइक का नतीजा भारत के पक्ष में कहीं ज्यादा हो सकता था.

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उन्होंने कहा कि बालाकोट अभियान के दौरान तकनीक हमारे पक्ष में थी तथा अगर हमारे पास राफेल विमान होता और बेहतर रिजल्ट मिलते. ‘भविष्य की एयरोस्पेस पावर और प्रौद्योगिकी के प्रभाव’ पर आयोजित की गए सेमिनार में बोलते हुए भारतीय वायु सेना प्रमुख ने कहा कि बालाकोट ऑपरेशन में हमारे पास तकनीक थी, जिससे हम बड़ी सटीकता के साथ हथियारों को लॉन्च कर सके. बालाकोट ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान से हुई झड़पों में भी हम बेहतर निकले, क्योंकि हमने अपने मिग-21 बायसन्स और मिराज-2000 विमानों को अपग्रेड किया था.

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धनोआ ने कहा कि रिजल्ट और भी शानदार होते अगर हमने समय पर राफेल विमान को शामिल कर लिया होता. धनोआ ने राफेल की ताकत को बताते हुए कहा कि राफेल और सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल प्रणाली के आने से अगले दो-चार सालों में एक बार फिर तकनीकी संतुलन हमारे पक्ष में हो जाएगा. जैसे कि 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के समय यह हमारे पक्ष में था. उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए राफेल काफी जरूरी है.

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