आतंक की शिक्षा बाप ने ही दी थी शायद हत्यारे जीनत उल इस्लाम को… तभी तो कुपुत्र के मरने के बाद दे रहा ऐसा बयान

  हाल ही में भारतीय सेना द्वारा मारे गये इस्लामिक आतंकी जीनत उस इस्लाम के अब्बू का कहना है कि जीनत की मौत                                         कोई रोने या मातम मनाने की बात नहीं है बल्कि ये फख्र की बात है. आतंकी के अब्बू ने कहा है कि                                                                            जिस मुकाम के लिए वह निकला था, उसको हम हासिल करके ही रहेंगे.

हाल ही में जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना ने जीनत उल इस्लाम नामक आतंकी को मार गिराया. आतंकी जीनत उल इस्लाम के अब्बू ने उसके जनाजे के दौरान लोगों को संबोधित किया, जिसका वीडियो वायरल हुआ है. वायरल हुए इस वीडियो में आतंकी का अब्बू कह रहा है कि यह मेरे लिए रोने या मातम मनाने की बात नहीं है. यह फख्र की बात है. वह जिस मकसद से निकला था वह हम हासिल करके रहेंगे. आतंकी जीनत का अब्बू इस बात के लिए शर्मशार नहीं हो रहा कि उसका बेटा इतना बड़ा नालायक निकला कि उसने देश के खिलाफ हथियार उठाया, बल्कि वह इस बात कर गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

आतंकी के अब्बू ने कहा कि अक्तूबर 2005 में जीनत घर से बाहर निकला था. इसके बाद लगभग ढाई साल तक कश्मीर से बाहर ही रहा. कश्मीर से बाहर का मतलब है लोलाब गया था. शोपियां से लगभग 150 किलोमीटर दूर लोलाब है. वह ढाई साल तक वहीं रहा, लेकिन वह कैसे रहा तथा किस वजह से रहा, इसका मुझे पता नहीं.

ढाई साल बाद उसके साथ रहने वाला आदमी (गाइड) घर आया और उसका नंबर दिया. उस जमाने में फोन उतना अधिक नहीं था. इस वजह से किसी से फोन लेकर बात करता था; फोन कॉल ट्रैप होने के बाद भी उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे मुझे कोई हानि होती. एक समय सिडको कैंप में मेजर मेरे सामने था, फिर भी मैंने उससे बात की. आज वह मारा गया तो ये मेरे लिए रोने या मातम मनाने की बात नहीं है बल्कि ये फख्र की बात है. वह जिस मकसद से निकला था वह हम हासिल करके रहेंगे.

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