इस बार सक्रिय कराया जा रहा है रिटायर्ड अफसरों का समूह, ठीक साहित्यकारों के अंदाज में. इनके भी निशाने पर है गौरक्षक…

मोदी सरकार द्वारा गाय की बिक्री बैन पर सभी कथित बुद्धजीवियों ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता ने कहना है कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के अधिकारों का शोषण कर रही है। तो केरल प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने देश के सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखाकर कहा कि केंद्रीय कानून बना राज्य अधिकारों का हनन कर रही है। मोदी या संघ ये नहीं तय कर सकता की हम क्या खाए क्या नही। वहीं पर सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि मोदी की बीफ नीति से गृहयुद्ध जैसे हालात भारत में पैदा होंगे। तेलांगना के कृषि मंत्री श्रीनिवास यादव ने कहा कि ये मोदी सरकार की कट्टरता सोच को दर्शाता है। इस पर कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है।

आप सभी ने कांग्रेस के मंत्री द्वारा दिए गए बयान को देखा पर एक बार भी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं ने गाय को काटे जाने का विरोध नहीं किया। सभी को केवल तुष्टिकरण की राजनीति एवम केंद्र सरकार की नीतिओं का विरोध कर अपनी राजनीति को चमकाना है। गाय को काटे जाने पर साम्प्रदायिकता नहीं होती क्या येचुरी साहब, सिर्फ हिन्दुओं के भावना से खिलवाड़ करना कट्टरता नहीं होती क्या, यादव जी, हा ममता जी और विजयन जी इसमें राज्य सरकार के अधिकार का हनन कहा हो रहा है आप खाइये जो मन करें पर गाय को छोड़ दीजिए जिसे हम माँ मानते है।

गोहत्या पर अभी तक चुप्पी साधे कांग्रेस के राष्ट्रवादी नेता सिर्फ अपनी राजनीति की रोटी सेकते है। भारत के लोगों अब तो आप संभल जाइये सारी सच्चाई आपके सामने है। आपको बता दें की पैंसठ के पूर्व नौकरशाहों के एक दल ने सरकारी निकायों से गुहार लगाई है कि वे देश में ‘बढ़ते अति राष्ट्रवाद’ और अधिनायकवाद’ को रोकने के लिए सही कदम उठाएं। कुछ हालिया घटनाओं के बारे में बताते हुए उन्होंने खुली चिट्ठी में कहा है कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा बंद करें सरकार इन पूर्व नौकरशाहों की लिखी चिट्ठी में केंद्र सरकार पर व्यंग कसते हुए कहा गया है कि देश में बढ़ते अति राष्ट्रवाद ने आलोचकों को पक्ष या विपक्ष में देखने का माहौल पैदा कर दिया है। मोदी सरकार द्वारा माहौल ऐसा बना दिया गया है कि अगर आप सरकार के साथ नहीं है तो इसका मतलब आप राष्ट्र विरोधी हैं। साफ संदेश है कि जो सत्ता में हैं उनसे सवाल नहीं पूछे जा सकते।

उन्होंने सार्वजनिक संस्थाओं और संवैधानिक निकायों से कहा है कि वे परेशान करने वाली इन प्रवृतियों की ओर ध्यान दें और इन्हें ठीक करने के कदम उठाएं। हम सबको फिर देश के संविधान के मूल्यों के बचाव में आगे आना होगा। चिट्ठी लिखने वालों में 91 वर्षीय आईएएस अफसर हर मंदर सिंह भी शामिल हैं। बता दें कि वह 1953 बैच के आईएएस अफसर रहे हैं। पूर्व संस्कृति सचिव और प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सरकार, आर्थिक मामलों के विभाग के पूर्व सचिव ईएएस शर्मा और मुंबई पुलिस के चीफ जूलियो रिबेरो के भी चिट्ठी पर हस्ताक्षर हैं। आपको बता दें कि मोदी सरकार के द्वारा गायों की व्यापक देखरेख करने के लिए चिकित्सालयों के अलावा भारत के प्रत्येक नगर में एक विभाग खोला जायेगा टोल, सड़क अथवा अन्य स्थानों पर मिलने वाली लावारिस गौ को गौशालाओं में ले जाने की व्यवस्था कर सकें। जिनसे वह किसी गौहत्यारे के चंगुल में न पड़ें।

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