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अब छात्र पढेंगे गीता का परमज्ञान और रामायण में लिखी मानव की मर्यादा.. धर्म शिक्षा करवाएगी सुकर्म

जब बात कर्म को अच्छा बनाने की आती है तब हिन्दू धर्म में गीता पढ़ने को कहा जाता है और जब बात मर्यादा में होने की होती है तो कहा रामचरित्र मानस को पढ़ कर राम के रास्तों पर चलों. बिलकुल राम राज्य की तर्ज पर भारत आगे बढ़ने की तरफ है और आपको बता दे कि इसमें पहल होनी चाहिए युवावों को धर्म कि शिक्षा से अवगत कराया जाए और उन्हें अनुशासित किया जाए.

ज्ञात हो कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर राष्ट्र के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक हैं और अब इस संस्थान ने फिर स्वयं को गौरवान्वित किया है। आईआईटी कानपुर अब राष्ट्र का पहला ऐसा इंजीनियरिंग संस्थान बन चुका हैं, जो हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथों से संबंधित टेक्स्ट और ऑडियो सेवा विद्यार्थियों तक पहुंचाएगा।

आपको बता दे कि, इंडियन प्रौद्योगिकी संस्थान के आधिकारिक पोर्टल पर एक लिंक है।

जिसकी सहायता से आप सरलता से इस सेवा का फायदा उठा सकते है।
ज्ञात हो कि संस्थान ने हिन्दू धर्म के 9 पवित्र ग्रंथों की सेवाएं प्रारम्भ की है। जिसमे श्रीमद भगवद्गीता, रामचरितमानस, ब्रह्मा सूत्र, योगसूत्र, श्री राम मंगल

दासजी और नारद भक्ति सूत्र मुख्य रूप से शामिल किये गए है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में आधिकारिक पोर्टल की लिंक www.gitasupersite.iitk.ac.in. पर वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में लिखी रामायण के सुंदरकांड व बालकांड का अनुवाद भी जोड़ा गया है।

आपको ये भी बताते चले कि डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर टीवी प्रभाकर ने बताया, “हमने समय-समय पर इस परियोजन पर आईआईटी के और बाहर के विद्वानों की मदद लेते हुए कार्य किया है, ताकि पवित्र ग्रंथों को उपलब्ध करवाया जा सके। यह हिंदुस्तान और संसार में पहली कोशिश है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।

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