40 सुखोई लड़ाकू पर ब्रह्रोस मिसाइलें तैनात.. आत्मा तक कांपी सरहद पार के दुश्मनों की

भारत में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी भारतीय वायुसेना को और अधिक ताकतवर बनाने का फैसला लिया हैं। पीएम मोदी ने वायुसेना को ताकतवर बनाने के ब्रह्मोस मिसाइल से लैस बनवाने की तैयारियां शुरु कर दी है।

आपको बता दे कि भारतीय वायुसेना की ताकत और तेजी से बढ़ रही है। दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए अग्रिम पंक्ति के 40 सुखोई लड़ाकू विमानों को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से लैस किया जा रहा है। ब्रह्मोस से लैस होने पर वायुसेना की ताकत में कई गुना इजाफा हो जाएगा।

ग़ौरतलब है कि 22 नवंबर को ही सुखोई से ब्रह्मोस मिसाइल को सफलतापूर्वक लांच किया गया था। इसके साथ ही वायुसेना ऐसा करने वाले चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गई। सूत्रों के मुताबिक 40 सुखोई विमानों को ब्रह्मोस से लैस करने का काम शुरू हो गया है। इस काम की समय-सीमा भी तय कर दी गई है। बताया जा रहा कि यह परियोजना 2020 तक पूरी हो जाएगी।
ब्रह्मोस के प्रक्षेपण के लायक बनाने के लक्ष्य से हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में इन 40 सुखोई विमानों में संरचनात्मक बदलाव किये जाएंगे।

ढाई टन वजनी यह मिसाइल ध्वनि की गति से तीन गुना तेज, मैक 2.8 की गति से चलती है और इसकी मारक क्षमता 250 किलोमीटर है।
भारत को पिछले वर्ष मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम की पूर्ण सदस्यता मिलने के बाद उस पर लगे कुछ तकनीकी प्रतिबंध हटने के बाद इस मिसाइल की क्षमता को बढ़ाकर 400 किलोमीटर तक किया जा सकता है। भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम वाला ब्रह्मोस मिसाइल सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के साथ तैनात किया जाने वाला सबसे भारी हथियार होगा।

ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है।

ये कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है इसलिए रडार की पकड़ में नहीं आती। ब्रह्मोस का 12 जून, 2001 को सफल लॉन्च किया गया था। इसका नाम भारत और रूस की नदियों को मिलाकर रखा गया है। भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मस्कवा नदी पर इसका नाम रखा गया है।
भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर ब्रह्मोस का नाम रखा गया है क्योंकि इसे डीआरड़ीओ ने भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर के तौर पर डेवलप किया।

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