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सुप्रीम कोर्ट को मिली संसद से मंजूरी अब बढ़ा सकते है जज की संख्या..


राज्यसभा ने सत्र के आखिरी दिन उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक 2019 बिना चर्चा के लोकसभा को लौटा दिया गया है. लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है.

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग एनजेएसी विधेयक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए प्रसाद ने कहा है कि फैसले में यह कहना उचित नहीं है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत की संसद का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा. मंत्री ने कहा कि न्यायाधीशों को विचार करना चाहिए कि उनकी जवाबदेही क्या है. प्रसाद ने कहा कि न्यायिक नियुक्ति में स्क्रीनिंग होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश अपेक्षा करता है कि न्यायपालिका में वंचित तबकों को मौका जरुर मिलना चाहिए.

मोदी कै सरकार ने 31 जुलाई 2019 को किसानों के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया. इस फैसले के मुताबिक फसलों के पोषण के हिसाब से किसानों को जो फर्टिलाइजर सब्सिडी मिलती थी, उसे और ज्यादा बढ़ाने का फैसला किया गया है. इसके लिए किसानों को 22,875 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी, जिसका खर्चा सरकार उठाएगी.

लोकसभा अध्यक्ष ने इस विधेयक को धन विधेयक घोषित किया था. सभापति नायडू ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि दिवंगत नेता के सम्मान में हमें इस विधेयक को बिना किसी वादविवाद के पारित करना चाहिए.

विधि एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सदन का ध्यान इस ओर दिलाया कि यह एक छोटा सा विधेयक है, जिसमें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 करने का प्रावधान किया गया है.

सदन में बनी सहमति के आधार पर सभापति ने इस विधेयक को बिना चर्चा के वापस लौटाने का प्रस्ताव किया जिसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई.

इससे पहले, बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि वह चाहते हैं कि शीर्ष न्यायपालिका में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का भी प्रतिनिधित्व हो.

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था. भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि न्यायाधीशों की कमी के कारण कानून के सवालों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में फैसला लेने के लिए आवश्यक संवैधानिक पीठों का गठन नहीं किया जा रहा है.

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारत के उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है. 1 जून 2019 तक उच्चतम न्यायालय में 58,669 मामले लंबित थे.

इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों तथा न्यायाधीशों की संख्या 906 से बढ़कर 1079 हो गई है. इसके कारण उच्च न्यायालय स्तर पर मामलों के निस्तारण में वृद्धि हुई है. इसके चलते उच्चतम न्यायालय में की जाने वाली अपीलों में वृद्धि हुई है.

मोदी कैबिनेट ने  में जजों की संख्या को बढ़ाने का फैसला किया है. आपको बता दें कि पहले सुप्रीम कोर्ट में 30 जज थे, जिनको बढ़ाकर अब जजों की संख्या 33 कर दी गई है यानी अब चीफ जस्टिस समेत सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 जज होंगे.


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